दैनिक भास्कर हिंदी: UGC के निर्देश पर 29 सितंबर को देशभर की शैक्षणिक संस्थाएं मनाएंगी सर्जिकल स्ट्राइक डे

September 21st, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय समेत देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को 29 सितंबर को अपने यहां "सर्जिकल स्ट्राइक डे' मनाने के निर्देश दिए हैं। UGC ने अपने इस निर्देश में 29 सितंबर के आयोजन की रूपरेखा भी स्पष्ट की है। विश्वविद्यालय की एनसीसी यूनिट को 29 सितंबर को विशेष परेड करनी होगी। इस परेड को एनसीसी कमांडर संबोधित करेंगे और सीमाओं की रक्षा के तौर-तरीकों पर चर्चा की जाएगी, साथ ही विश्वविद्यालयों को पूर्व सैन्य अफसरों को आमंत्रित करके परिचर्चा का आयोजन करना होगा, ताकि छात्रों में सशस्त्र सेनाओं के बलिदान के प्रति संवेदनशीलता बढ़े। निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षा संस्थान इस दिन पर पूर्व सैनिकों के साथ परिचर्चा का सत्र रखें। इसमें उनके बलिदान के बारे में विद्यार्थियों को बताया जाए। इसके अलावा विशेष परेड का आयोजन भी हो। इस दौरान प्रदर्शनियां लगाई जाएं और सशस्त्र बलों के समर्थन में उन्हें ग्रीटिंग कार्ड प्रेषित किए जाएं।

इंडिया गेट पर विशेष आयोजन
29 सितंबर को दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर एक विशेष मल्टी मीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। ऐसी ही प्रदर्शनी का आयोजन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, महत्वपूर्ण कस्बों और देश भर की सैन्य छावनियों में किया जा सकता है। आयोग का सुझाव है कि विद्यार्थी को पत्र लिखकर और कार्ड के माध्यम से सशस्त्र सेनाओं के समर्थन की शपथ लेनी होगी। यह कागज और डिजिटल दोनों ही रूप में होंगे। UGC का कहना है कि इन पत्रों और कार्ड को पीआरओ डिफेंस और पीआईबी से साझा की जाएगी, ताकि मीडिया के विभिन्न माध्यमों तक पहुंच सके।

सफलता मान रहे हैं
मौजूदा सरकार सर्जिकल स्ट्राइक को अपनी एक उपलब्धि के तौर पर देख रही है। बीते दिनों सर्जिकल स्ट्राइक की प्रमाणिकता को लेकर बहस छिड़ गई थी, मगर अब 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे के रूप में मना कर सीधे इसे उपलब्धि माना जा रहा है। दावा है कि इस युद्ध में भारतीय सेना ने अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग किया था। भारतीय जवानों ने इस ऑपरेशन में ट्रिवोर असॉल्ट राइफल का उपयोग किया था। यह इजराइल से मंगवाई गई राइफल थी, जिसे फुल ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक मोड पर लगाया जा सकता है। इस ऑपरेशन में भारतीय जवानों ने डिस्पोजेबल राकेट लांचर का भी प्रयोग किया था, जिसमें राकेट लांचर को लांच करने के बाद भी ढोने की जरूरत नहीं होती, इसे राकेट की लांचिग के बाद फेंक दिया जाता है।