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महाराष्ट्र : आर्थिक संकट पर पूरक बजट पेश करे केंद्र सरकार - चव्हाण

महाराष्ट्र : आर्थिक संकट पर पूरक बजट पेश करे केंद्र सरकार - चव्हाण

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आर्थिक विकास के साथ ही सीधे लाभ की योजनाओं पर जोर देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र सरकार से आह्वान किया है कि वह आर्थिक संकट को लेकर संसद में  पूरक बजट लाए। देश को बताए कि किसे व किस तरह का आर्थिक लाभ दिया जा रहा है। अगले वित्तीय वर्ष में देश की विकास दर का आकलन भी सरकार बताए।   नागपुर के वरिष्ठ पत्रकारों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से चर्चा में वे बोल रहे थे।

केंद्र की नीतियां गलत
चव्हाण ने कहा कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां गलत हैं।  कोरोना संकट के पहले ही देश की विकास दर गिर गई थी। इस वर्ष की पहली तिमाही में दर 3.1 प्रतिशत थी। नोटबंदी व जीएसटी के कारण देश में पहले ही आर्थिक संकट आ गया था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्थिक सुधार व आत्मनिर्भरता की बात कर रहे हैं। संकट के इस दौर 
में प्रधानमंत्री को विकास के दावों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना चाहिए। सरकार ने जो बजट पेश किया था, उसके लिहाज से स्थिति काफी बदल गई है। पूरक बजट में जानकारी दी जाए कि किस तरह आर्थिक नियोजन हो रहा है।

यह भी कहा
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण कंफ्यूज्ड लगती हैं। आर्थिक मामलों को लेकर भाजपा में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सबको लगता है कि वित्तमंत्री अपने विभाग को न्याय नहीं दे पा रही हैं।
प्रधानमंत्री राहत कोष के बारे में पारदर्शिता की जरूरत है। इस कोष को नया नाम देने का औचित्य समझ में नहीं आता है। 1948 से यह कोष बना है। किसी प्रधानमंत्री ने इसका नाम नहीं बदला।
केवल श्रम कानून बदलने से विदेशी निवेश नहीं बढ़ जाएगा। दुनिया में भारत के अलावा 49 देश हैं, जहां विदेशी निवेश का अधिक आकर्षण है। श्रम कानून से सामाजिक न्याय को संरक्षण मिला है। इस पर राष्ट्र व्यापी चर्चा हो। आत्मनिर्भरता की बात पर भी चर्चा होनी चाहिए।
वित्तीय आपातकाल लागू करने का संवैधानिक प्रावधान है। सरकार तय करे कि इसकी आवश्यकता है या नहीं। कुछ देशों ने कर्मचारियों को सीधे वेतन राहत दी है। यहां भी वैसा होना चाहिए।

राजभवन से हो रहा अस्थिरता का प्रयास
लगता है राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का प्रयास राजभवन से हो रहा है। कोरोना संकट के समय सभी में समन्वय होना चाहिए। राज्यपाल भगतसिंह कोशियारी की भूमिका पर कहा कि कारण नहीं रहते हुए भी कहीं दखल देना ठीक नहीं है। भाजपा की मांगों पर राज्यपाल सरकार को उचित सलाह दें, लेकिन कई बार यह तस्वीर दिखने लगती है कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का प्रयास राजभवन से हो रहा है। महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस छोटा दल है। उसके  मंत्रियों के विभाग की स्थिति भी सभी जानते हैं। फिर भी सरकार के निर्णायक मामलों में कांग्रेस का पूरा योगदान रहता है।  एक प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर किसी भी  स्तर पर उनसे चर्चा नहीं हुई है
  

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