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नागपुर के वायु प्रदूषण को कम करेगा फ्रांस, बड़े पैमाने में होंगे उपाय

September 09th, 2018 19:54 IST
नागपुर के वायु प्रदूषण को कम करेगा फ्रांस, बड़े पैमाने में होंगे उपाय

डिजिटल डेस्क, नागपुर। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए इथेनॉल आधािरत ग्रीन बसों और सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना होगा। ज्ञात रहे कि ग्रीन हाउस गैस के ज्यादा उत्सर्जन से पूरी दुनिया जूझ रही है। इसमें कमी करने के भारत सहित पूरी दुनिया के तमाम देश अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं। ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन के मामले में भारत विश्व का चौथा देश है। इसी क्रम में फ्रांस नागपुर, कोच्चि और अहमदाबाद में वाहन जनित वायु प्रदूषण घटाने पर ‘मोबिलाइज योर सिटी’ कार्यक्रम को निवेश और तकनीकी सहायता के लिए 3.5 मिलियन यूरो देने पर सहमत हुआ है। इसके अंतर्गत देश में तीन पायलट शहरों का चयन किया गया है और इसमें नागपुर भी शामिल है। इसका उद्देश्य  ग्रीन हाउस-उत्सर्जन में कमी लाने में सहायता देना है। भारत और फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम ‘मोबिलाइज योर सिटी (एमवाईसी)’ को लागू करने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

मोबिलाइज योर सिटी (एमवाईसी) एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जो फ्रांस और जर्मनी की सरकारों द्वारा समर्थित है। इसे दिसंबर, 2015 में 21वीं कांफ्रेंस ऑफ पार्टिज (सीओपी 21) में लांच किया गया। 2015 में एएफडी के प्रस्ताव के आधार पर यूरोपीय संघ ने भारत में मोबिलाइज योर सिटी कार्यक्रम में निवेश और तकनीकी सहायता के लिए 3.5 मिलियन यूरो की राशि देने पर सहमति व्यक्त की है। शहरी परिवहन से संबंधित ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन कम करना है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर सतत परिवहन नीति में सुधार के लिए भारत को मदद देना है। तकनीकी सहायता गतिविधियों से कार्यक्रम के अंतर्गत चुने गए तीन पायलट शहरों के साथ-साथ आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भी लाभ भी दिया जाएगा।

स्थानीय प्रशासन को यह करना होगा
सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को शहरी परिवहन परियोजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन नया स्वरूप देना होगा। वहीं,  शहरी आवाजाही के नियमन संचालन और नियोजन के लिए नई नीतियां बनानी होंगी। स्मार्ट सिटी के लिए स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी), नगर महापालिकाएं और परिवहन प्राधिकरण तथा परिवहन संबंधी एसपीवी जैसे नियम शुरू करने होंगे।

भारत 6.9 फीसदी का उत्सर्जन करता है
समझौते में सरकार की तरफ से इसमें कमी लाने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एक टाइमलाइन भी बनाई गई है, जिसके अनुसार 2030 तक ग्रीन हाउस गैस के मामले में 33-35 फीसदी की कमी कर लेगा। वहीं 2020 तक यह लक्ष्य 20-25 फीसदी करने का है। ग्रीन हाउस गैस के मामले में भारत हर साल अपनी तरफ से 6.9 फीसदी का उत्सर्जन करता है।

इस कारण नागपुर में वायु प्रदूषण बढ़ा है
महानगर में धूल के कणों की वजह से वायु प्रदूषण बढ़ा है। कंस्ट्रक्शन साइट, सड़कों के किनारे से उड़ रही धूल प्रदूषण में और इजाफा कर रही कंस्ट्रक्शन साइट  सड़कों के किनारे से उड़ रही धूल प्रदूषण में और इजाफा कर रही हैं। सबसे बड़ा कारण कंस्ट्रक्शन साइटों, नए बन रहे घर, मेट्रो और सीमेंट रोड शामिल हैं। स्मार्ट सिटी बनने की वजह से जगह जगह नई इमारतें बन रही हैं, कई जगह मेट्रो बन रही है और ये सब भी वायु प्रदूषण में इजाफा कर रहा है। वहीं सड़कों के उखड़ने से समस्या दोगुनी हो गई है, इससे उड़ने वाली धूल से संस्पेंडेंड पार्टीक्ल्स मैटर व रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर में इजाफा हुआ है। हमारे सबसे ज्यादा कंस्ट्रक्शन साइट हैं और उनकी वजह से ज्यादा समस्या बढ़ी है। पिछले महीने में एयर पाल्यूशन के स्तर में वृद्धि हुई है।

ऐसे रोकेंगे
कौस्तुभ चैटर्जी, संस्थापक, ग्रीन विजिल फांउडेशन के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग में कमी के लिए मुख्य रूप से सीएफसी गैसों का उत्सर्जन कम रोकना होगा। औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं हानिकारक है और इनसे निकलने वाला कार्बन डाइआॅक्साइड गर्मी बढ़ाता है। इन इकाइयों में प्रदूषण रोकने के उपाय करने होंगे। वाहनों में से निकलने वाले धुएं का प्रभाव कम करने के लिए पर्यावरण मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। उद्योगों और खासकर रासायनिक ईकाईयों से निकलने वाले कचरे को फिर से उपयोग में लाने लायक बनाने की कोशिश करनी होगी और प्राथमिकता के आधार पर पेड़ों की कटाई रोकनी होगी। सोलर एनर्जी व इथेनॉल ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना होगा। पुरानी गाड़ियों के इंजन बदलने होंगे। फ्यूल बदलना होगा। 
    
स्थानीय प्रशासन को यह करना होगा
सबसे पहले स्थानीय प्रशासन को शहरी परिवहन परियोजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन नया स्वरूप देना होगा। वहीं,  शहरी आवाजाही के नियमन संचालन और नियोजन के लिए नई नीतियां बनानी होंगी। स्मार्ट सिटी के लिए स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी), नगर महापालिकाएं और परिवहन प्राधिकरण तथा परिवहन संबंधी एसपीवी जैसे नियम शुरू करने होंगे।

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