दैनिक भास्कर हिंदी: स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में नागपुर 18वें नंबर पर

August 21st, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर ।  स्वच्छता के मैदान में नागपुर ने झंडा बुलंद किया है। पिछले साल 58वें नंबर पर रहने वाला नागपुर इस साल स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 18 वें नंबर पर है। यह संतरानगरी के लिए खुशी की बात है। 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में नागपुर ने "टॉप-20' शहरों में जगह बनाई है।   केंद्र सरकार ने यह रैंकिंग जारी की है। खास बात यह कि नागपुर ने इस बार हमेशा आगे रहने वाले ग्रेटर मुंबई, पिंपरी चिंचवड़, वसई विरार जैसे शहरों को पछाड़ा है। पिछले साल तीनों शहरों की क्रमशः 35, 24 और 32 रैंकिंग थी। इस साल ये तीनों शहर नागपुर से कई पायदान पिछड़ गए हैं। मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने मनपा टीम को बधाई दी है। उन्होंने रैंकिंग में और सुधार की अपेक्षा भी की है। 

4 श्रेणी पर नजर
स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग के लिए 4 श्रेणी तय हैं। 31 जनवरी 2020 के पहले शहर में किए गए स्वच्छता कार्य के आधार पर रैंकिंग दी जाती है। नागपुर की रैंकिंग में सुधार के लिए तत्कालीन आयुक्त अभिजीत बांगर की कड़ी मेहनत को श्रेय जाता है। किसी तरह की कमी न रह जाए, इसके लिए उन्होंने मनपा के एक अधिकारी को सर्विस लेवल प्रोग्रेस में जानकारी भरने के लिए मुंबई में बैठा कर रखा था। यही कारण है कि मनपा को इस बार सर्विस लेवल प्रोग्रेस में अच्छे अंक (1500 में से 1208) मिले हैं।  पिछली बार 1250 में से सिर्फ 538 अंक मिले थे। डायरेक्ट ऑब्जरवेशन में 1500 में से 1354 अंक मिले। पिछले वर्ष 1250 में 1138 मार्क मिले थे। सिटीजन फीडबैक में इस साल 1500 में से 1283 अंक मिले। पिछले साल 1250 में से 923 मिले थे। सर्टिफिकेशन में मनपा पिछड़ गई। इस साल 1500 में से 500 अंक मिले हैं। पिछले वर्ष 1250 में से 550 अंक मिले थे।

और हो सकती थी बेहतर स्थिति
नागपुर की रैंकिंग इससे भी बेहतर आ सकती थी। परंतु सर्टिफिकेशन में काफी कम अंक मिले हैं। सड़क स्वच्छता के मामले में दो प्रभागों की वजह से अच्छे अंक नहीं मिले। हालांकि इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागपुर की सड़कें अन्य शहरों की सड़कों की तुलना में अधिक स्वच्छ हैं। फिर भी इसमें कम अंक मिलने पर हैरानी जताई जा रही है।

53 में से 47 शहरों ने लिया हिस्सा
पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में छोटे-बड़े 425 शहर शामिल हुए थे। इसमें नागपुर की रैंकिंग 58 आई थी। इस बार सर्वेक्षण को दो श्रेणी में बांटा गया। एक से 10 लाख आबादी और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर। इसकी वजह से 425 शहर दो भाग में बंट गए। दूसरे श्रेणी में नागपुर सहित 53 शहरों के नाम सूची में थे। इसमें से 47 शहरों ने हिस्सा लिया।