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कोरोनावायरस: नागपुर हाईकोर्ट ने कहा- देश में वर्तमान स्थिति असामान्य

कोरोनावायरस: नागपुर हाईकोर्ट ने कहा- देश में वर्तमान स्थिति असामान्य

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में कोरोना पर केंद्रित सू-मोटो जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। न्या.सुनील शुक्रे की खंडपीठ ने कहा है कि यह स्थिति एक असामान्य स्थिति है, जिससे असामान्य तरीके स निपटना होगा। बता दें कि इसी इमरजेंसी की स्थिति में राज्य लेखा व कोषागार संचालनालय के एक सर्कूलर ने विविध सरकारी विभागों में पैनिक निर्माण कर दिया है। इस सर्कूलर के तहत संचालनालय ने राज्य की सभी जिला कोषागार और उपकोषागार कार्यालयों को विविध सरकारी विभागों से केवल 27 मार्च तक ही पेमेंट और ट्रेजरी बिल स्वीकार करने के निर्देश दिए थे।

न्यायालीन मित्र एड. अनूप गिल्डा ने यह मुद्दा हाईकोर्ट के समक्ष रखा। हाईकोर्ट ने माना है कि यह डेडलाइन बहुत कम है। राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण से बचाव के उदेश्य से सरकारी विभागों मे सिर्फ 5 प्रतिशत कर्मचारियों को काम करने की अनुमति दी है। इतने कम स्टाफ के साथ सरकारी विभाग 27 मार्च तक कोषागार कार्यालय में बिल भेजेंगे, यह उम्मीद रखना सही नहीं होगा। इसकी जगह संचालनालय को 31 मार्च के बाद की कोई डेडलाईन देनी चाहिए थी। कोषागार संचालनालय के सर्कूलर से इससे स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के अनावश्यक पैनिक निर्माण होगा। उनकी प्राथमिकता अभी कोरोना संक्रमण को रोकने की है। ऐसे में हाईकोर्ट ने कोषागार संचालनालय और राज्य वित्त सचिव को सर्कूलर पर पुनर्विचार जारी करने के लिए नई डेडलाइन तय करने के निर्देश दिए है

निजी मेडिकल कॉलेजों-अस्पतालों में करें सुरक्षा प्रबंध
हाईकोर्ट ने राज्य चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान संचालनालय को निर्देश दिए है कि प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जहां कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है, वहां के डॉक्टरों और स्टाफ के लिए सुरक्षा किट पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों के स्टाफ की तरह निजी अस्पतालों के स्टाफ की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। मामले में राज्य सरकार की ओर से एड.सुमंत देवपुजारी और केंद्र सरकार की ओर से एड.उल्हास औरंगाबादकर ने पक्ष रखा। 


सिर्फ अर्जेंट मामलों की सुनवाई, रजिस्ट्रार जनरल के आदेश
राज्य में हाईकोर्ट की विविध बेंचों, जिला व सत्र न्यायालय समेत सभी अदालतों में 15 अप्रैल तक नियमित कामकाज नहीं चलेगा। सिर्फ अर्जेंट मामलों पर ही सुनवाई होगी। रजिस्ट्रार जनरल एस.डी.कुलकर्णी ने गुरुवार को यह आदेश जारी किए है। इसके पूर्व 23 मार्च को उनकी ओर से जारी सर्कूलर में अदालतों के नियमित कामकाज पर 31 मार्च तक रोक लगाई गई थी। कुछ विशेष शर्तें और छूट इस दौरान लागू थी। अब इस व्यवस्था को 15 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में 21 दिनों के पूर्ण लॉकडाऊन के बाद हाईकोर्ट की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। इसके पूर्व अदालतों के कामकाज के घंटे भी घटा दिए गए थे। हाईकोर्ट में दो घंटे और निचली अदालत में सिर्फ 3 घंटे कामकाज की अनुमति दी गई थी। इस दौरान सीमित स्टाफ के साथ काम करने से लेकर अदालतों में पक्षकारों और वकीलों की भीड ना जुट सके इसके प्रबंध करने के भी आदेश हाईकोर्ट ने जारी किए थे। यह व्यवस्था अब 15 अप्रैल तक कायम रहेगी।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।