Moratorium: कर्जदारों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने लोन रिपेमेंट मोराटोरियम को 28 सितंबर तक बढ़ाया

Moratorium: कर्जदारों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने लोन रिपेमेंट मोराटोरियम को 28 सितंबर तक बढ़ाया

Bhaskar Hindi
Update: 2020-09-10 08:36 GMT
Moratorium: कर्जदारों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने लोन रिपेमेंट मोराटोरियम को 28 सितंबर तक बढ़ाया
हाईलाइट
  • योजना की पिछली समय सीमा
  • 31 अगस्त को समाप्त हो गई थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने लोन रिपेमेंट मोराटोरियम को 28 सितंबर तक बढ़ाया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोन रिपेमेंट मोराटोरियम को 28 सितंबर तक बढ़ा दिया है। इस योजना की पिछली समय सीमा, 31 अगस्त को समाप्त हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मोहलत के दौरान लोन पर ब्याज नहीं लेने और न ही उधारकर्ताओं की क्रेडिट रेटिंग या एसेट क्लासिफिकेशन को अपग्रेड करने के लिए दायर याचिका पर विचार करने के लिए कहा। कोर्ट ने सरकार से इस मामले को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और दूसरे उधारदाताओं से परामर्श कर कोई ठोस निर्णय लेने को कहा।

कर्जदारों के एक समूह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने अदालत को बताया कि लोन के मामलों में अभी भी कंपाउंड इंटरेस्ट वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा, राहत कहां है? लोन को रिस्ट्रक्चर किया जा रहा है, जो कि पहले किया जाना चाहिए था। राजीव दत्ता ने कहा, लाखों लोग अपनी बीमारी के चलते अस्पतालों में हैं, बहुत से लोगों ने अपनी आय के स्रोत खो दिए हैं। केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, मोराटोरियम के मुद्दे पर राहत का फैसला करना चाहिए और ब्याज पर छूट देना चाहिए।

ब्याज माफ करना नुकसानदेह साबित होगा
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि अगर ऋण रियायत अवधि का ब्याज माफ कर दिया गया तो यह नुकसानदेह साबित होगा। इससे बैंकों की सेहत खराब हो जाएगी। बैंक कमजोर पड़ जाएंगे, जो कि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्निर्माण करने के लिए मजबूत बैंकों का होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि विभिन्न प्रकार के बैंक हैं, एनबीएफसी भी हैं।

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर RBI ने मोरे​टोरियम दिया था
कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर, RBI ने 27 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कर्जधारकों को तीन महीने की अवधि के लिए किश्तों के भुगतान के लिए मोहलत दी गई थी। बाद में 22 मई को RBI ने 31 अगस्त तक के लिए तीन और महीने की मोहलत की अवधि बढ़ाने की घोषणा की थी। नतीजतन लोन EMI पर छह महीने के लिए ये मोहलत बन गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि बैंक EMI पर मोहलत देने के साथ-साथ ब्याज लगा रहे हैं जो कि गैरकानूनी है।

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