प्रतिवर्ष 50 करोड़ की टैक्स चोरी जीएसटी के बाद भी हो रहा बिना बिल का कारोबार

 प्रतिवर्ष 50 करोड़ की टैक्स चोरी जीएसटी के बाद भी हो रहा बिना बिल का कारोबार

Bhaskar Hindi
Update: 2020-03-02 09:50 GMT
 प्रतिवर्ष 50 करोड़ की टैक्स चोरी जीएसटी के बाद भी हो रहा बिना बिल का कारोबार

डिजिटल डेस्क दमोह । केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी लागू किए दो वर्ष बीत चुके हैं ,लेकिन बिना बिल का कारोबार व टैक्स चोरी पर लगाम नहीं लग पा रही है। जानकार बताते हैं कि जब से जीएसटी लागू हुआ है तब से दमोह जिले के अंतर्गत आने वाले हर क्षेत्र में प्रतिवर्ष 50 करोड़ का कारोबार बिना बिल के हो रहा है।
सीजीएसटी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा व्यापारियों के बिना बिल के कारोबार में रोक लगाने व टैक्स चोरी रोकने के लिए जीएसटी यानी गुडस एंड सर्विसेस लागू किया था। जीएसटी का आरंभिक दौर में व्यवसायियों द्वारा विरोध किया गया लेकिन बाद इसकी अनिवार्यता को देखते व  जुर्माना से बचने के लिए उनके द्वारा ग्राहकों से जीएसटी मांगना शुरू कर दिया।  
बिल मांगने पर मांगते ज्यादा दाम
 सूत्र बताते हैं कि जब कोई ग्राहक कोई वस्तु लेने दुकानदार के पास जाते हैं तो दुकानदार उसके द्वारा बिल मांगने पर वस्तु के अधिक दाम मानता है। दुकानदार की मांग का जब ग्राहक विरोध कहता है तो उसे जीएसटी का हवाला देते यह सलाह दी जाती है कि बिल ना लेने पर उससे जीएसटी नहीं लिया जाएगा, क्योंकि ग्राहक भी टैक्स नहीं देना चाहता है अत: दुकानदार की सलाह मान लेता है।
प्रकरण क्रमांक 1
 तेंदूखेड़ा निवासी प्रकाश यादव बताते हैं कि उसने 1 सप्ताह पूर्व बाजार से इंडक्शन चूल्हा खरीदा दुकानदार ने 1600  रुपए देकर लेकर चूला दिया उन्होंने बताया कि जब उसने दुकानदार से विल मांगा तो  जीएसटी की मांग की जिस से ज्यादा राशि देने से बचने के लिए बिना विल के ही इंडक्शन चूल्हा घर ले आया।
 प्रकरण क्रमांक 2 
दमोह निवासी राजकुमार ने बताया कि वह गत दिवस जींस पैंट खरीदने बाजार गया था दुकान दार से पेंट पसंद कर जब खरीदा और दुकानदार से बिल मांगा तो व्यापारी ने ज्यादा दाम बताएं कारण पूछने पर उसका कहना था कि बिल मांगोगे तो 8 फीसदी जीएसटी देना पड़ेगी और बगैर बिल के पेंट लैंने पर जीएसटी नहीं लगेगी ,राजकुमार ने बिना बिल के पेंट खरीद कर लौट आया।
दो सौ रुपए के लेनदेन में छूट
 जानकारों के अनुसार 200 रुपए के लेनदेन में बिल जरूरी नहीं है ,लेकिन उससे अधिक राशि के लेनदेन पर बिल अवश्य लेना चाहिए। नियम के अनुसार ग्राहक अगर बिल ना मांगे तो भी व्यापारी को बिल अवश्य काटने चाहिए ।समझा जाता है कि सरकार को जीएसटी के रूप में होने वाली क्षति के लिए जहां दुकानदार दोषी हैं, वही ग्राहक भी कम दोषी नहीं है, जो कम दाम चुकाने के चक्कर में सरकार को चूना लगाने में सहायक बन रहे हैं।
 इनका कहना है 
हमारा प्रयास यह होता है कि प्रत्येक लेनदेन में उपभोक्ता बिल की मांग करें लेकिन इसके बाद भी यह माना जाता है कि 5 से 10 फीसदी कारोबार बिना बिल के संचालित किया जा रहा है। मनोरमा तिवारी
 जीएसटी कमिश्नर
 

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