आसाराम की डर्टी पिक्चर के दो मुख्य किरदार, जानिए कौन हैं शिल्पी और शरदचंद्र

आसाराम की डर्टी पिक्चर के दो मुख्य किरदार, जानिए कौन हैं शिल्पी और शरदचंद्र

Bhaskar Hindi
Update: 2018-04-25 06:46 GMT
आसाराम की डर्टी पिक्चर के दो मुख्य किरदार, जानिए कौन हैं शिल्पी और शरदचंद्र

डिजिटल डेस्क, भोपाल। नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में जोधपुर की स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को उसके दो सेवादारों समेत दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान भी कर दिया है। जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि शिल्पी और शरद को 20-20 साल की सजा सुनाई है। वहीं बुधवार को स्पेशल कोर्ट ने आसाराम के दो अन्य सहयोगियों प्रकाश और शिवा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने 5 आरोपियों में से जिन 3 को सजा सुनाई है, उनमें खुद आसाराम, सेवादार शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और शरदचन्द्र शामिल है। कोर्ट ने इन दोनों को आसाराम की इस डर्टी पिक्चर का मुख्य राजदार माना है।

शिल्पी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम की वॉर्डन थी। शरदचंद्र भी इसी आश्रम का मुख्य सेवादार था। पीड़िता को हॉस्टल से आसाराम तक लाने का काम शिल्पी ने ही किया था। आसाराम के इन सभी गलत कामों में इन दोनों को ही मुख्य आरोपी बताया गया है। यूपी के शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता के दिल्ली आने और यहां से जोधपुर जाने के बीच इन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। पीड़िता ने दिल्ली के कमलानगर थाने में 19 अगस्त 2013 को आसाराम सहित इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

 

 

हॉस्टल वार्डन शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता  


मामले में सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने आसाराम के बाद शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता को मुख्य आरोपी माना है। शिल्पी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम की वॉर्डन थी। उसकी इस मामले में यह भूमिका थी कि उसने पीड़िता को पहले तो भूत-प्रेत का डर दिखाया। उसके बाद उसे इलाज के लिए छात्रा को दुष्प्रेरित कर आसाराम के पास भेजा।

हॉस्टल संचालक शरदचन्द्र उर्फ शरतचन्द्र


शरदचन्द्र उर्फ शरतचन्द्र भी शिल्पी के साथ इस मामले में मुख्य आरोपी माना गया है। शरदचंद्र भी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम में हॉस्टल संचालक था। उसकी भूमिका इस मामले में यह थी कि पीड़िता की बीमारी का पता चलने पर भी उसका इलाज नहीं कराया गया। उसने पूरी रात अनुष्ठान कराया और पीड़िता को यह विश्वास दिलाया कि उसकी बीमारी का इलाज सिर्फ आसाराम के पास ही है। इसके बाद उसने पीड़िता को आसाराम के पास जाने के लिए मनाकर भेज दिया।

गौरतलब है कि मामले में प्रमुख सेवादार शिवा उर्फ सेवाराम और आश्रम के रसोइया प्रकाश द्विवेदी को भी आरोपी बनाया गया था। मगर बुधवार को स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के बाद इन दोनों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

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