प्रतिबंधित ऐप को डाउनलोड करने के लिए चाइनीज यूनिवर्सिटीज कर रही मजबूर, भारतीय छात्रों की ऑनलाइन स्टडी बुरी तरह प्रभावित

प्रतिबंधित ऐप को डाउनलोड करने के लिए चाइनीज यूनिवर्सिटीज कर रही मजबूर, भारतीय छात्रों की ऑनलाइन स्टडी बुरी तरह प्रभावित

Bhaskar Hindi
Update: 2021-07-21 11:07 GMT
प्रतिबंधित ऐप को डाउनलोड करने के लिए चाइनीज यूनिवर्सिटीज कर रही मजबूर, भारतीय छात्रों की ऑनलाइन स्टडी बुरी तरह प्रभावित
हाईलाइट
  • इसकी वजह है भारत सरकार की ओर से प्रतिबंधित किए गए कुछ चाइनीज ऐप
  • इनमें से करीब 20
  • 000 तो मेडिकल के छात्र है
  • चाइनीज यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे 23
  • 000 से ज्यादा छात्रों की ऑनलाइन स्टडी बुरी तरह से प्रभावित

डिजिटल डेस्क, सूरत। चाइनीज यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे 23,000 से ज्यादा छात्रों की ऑनलाइन स्टडी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इनमें से करीब 20,000 तो मेडिकल के छात्र है। इसकी वजह है भारत सरकार की ओर से प्रतिबंधित किए गए कुछ चाइनीज ऐप। दरअसल, इस छात्रों को अपनी स्टडी जारी रखने के लिए भारत में प्रतिबंधित चाइनीज एप को डाउनलोड करने के लिए फोर्स किया जा रहा है। 

भारत ने सीमा पर गतिरोध के बाद लगभग 250 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। चीन के अधिकांश विश्वविद्यालय WeChat, DingTalk, SuperStar और Tencent के एक वीडियो चैट ऐप जैसे ऐप का उपयोग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय उन्हें अपने पाठ्यक्रम जारी रखने के लिए प्रतिबंधित मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

इंडियन स्टूडेंट्स इन चाइना (ISC) ने इस मुद्दे को चीनी और भारतीय दोनों अधिकारियों के सामने उठाया है। एक अस्थायी समाधान के रूप में, छात्र कक्षाओं में भाग लेने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के माध्यम से इन ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं। दिल्ली के एक छात्र शाहरुख खान जो वर्तमान में चीन की सूचो यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं ने कहा, पहले मेरी कक्षाएं वीचैट एप पर ऑनलाइन आयोजित की जाती थीं। लेकिन भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बाद, मेरे विश्वविद्यालय ने एक और चीनी प्लेटफॉर्म डिंगटॉक का उपयोग करना शुरू कर दिया, लेकिन वह भी प्रतिबंधित हो गया।

ये छात्र 3 लाख रुपये से 4.5 लाख रुपये के बीच वार्षिक ट्यूशन फीस का भुगतान करते हैं। इसके अलावा, चीन की यात्रा पर भी अभी भी प्रतिबंध लगा हुआ है। ISC के नेशनल कॉर्डिनेटर ने कहा, नेटवर्क के इश्यू के कारण हम लेक्चर अटेंड नहीं कर सकते। बहुत सारी गड़बड़ी के कारण, हम कभी-कभी बेसिक डिटेल्स भी नहीं समझ पाते हैं।

जयपुर के छात्र निम्रत सिंह ने हाल ही में हार्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सेकेंड ईयर पूरा किया है। सिंह अब नेशनल एग्जिट टेस्ट (एनईएक्सटी) परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं जो विदेशी छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य है। सिंह ने कहा, "मुझे नहीं पता कि मैं कब रेगुलर क्लास अटेंड कर पाऊंगा और हमें ऑनलाइन क्लासेज में शामिल होने में भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मेरी यूनिवर्सिटी Tencent ऐप पर क्लासेज कंडक्ट कर रही है, जो भारत में प्रतिबंधित है।

भारत के विभिन्न संगठन सक्षम अधिकारियों के साथ मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिणी गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स (एसजीसीसीआई) के एक सदस्य मनीष कपाड़िया ने कहा, "गुजरात के छात्रों की ओर से, मैं और कुछ अन्य केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ इन छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं।"

Tags:    

Similar News