प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मिनट तक की मन की बात, किसानों के लिए नहीं बोला एक भी शब्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मिनट तक की मन की बात, किसानों के लिए नहीं बोला एक भी शब्द

Bhaskar Hindi
Update: 2020-12-27 04:55 GMT
हाईलाइट
  • पीएम मोदी ने देशवासियों से की मन की बात
  • मन की बात में किसानों का जिक्र नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 के आखिरी मन की बात कार्यक्रम को आज संबोधित किया। करीब 30 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कोरोना वायरस से लेकर तेंदुओं की बढ़ती आबादी तक का जिक्र किया। लेकिन एक शब्द भी किसानों के लिए नहीं बोला। पीएम मोदी ने रेडियो के मध्यम से कोरोनावायरस, आत्मनिर्भर भारत, लॉकडाउन, भारत अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, तेंदुओं की आबादी, समुद्र तटों की सफाई और लोगों के उन्हें भेजे गए पत्रों पर चर्चा की। वहीं, किसान संगठनों ने इस कार्यक्रम को थाली बाजकर विरोध किया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वर्ष 2020 के अपने आखिरी रेडियो संबोधन मन की बात के दौरान देश में शेर, बाघ और तेंदुओं की आबादी बढ़ने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे आनंद और गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय सरकार के साथ संरक्षण की दिशा में जुटी सिविल सोसाइटी और संस्थाओ को भी दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, पिछले कुछ सालों में, भारत में शेरों की आबादी बढ़ी है, बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, साथ ही, भारतीय वनक्षेत्र में भी इजाफा हुआ है। इसकी वजह ये है कि सरकार ही नहीं बल्कि बहुत से लोग, सिविल सोसाइटी, कई संस्थाएं भी, हमारे पेड़-पौधों और वन्यजीवों के संरक्षण में जुटी हुई हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में लियोपार्ड यानी तेंदुओं की संख्या में, 2014 से 2018 के बीच, 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में देश में तेंदुओं की संख्या लगभग 7,900 थी, वहीं 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 12,852 हो गई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ये वही तेंदुए हैं जिनके बारे में जिम कार्बेट ने कहा था- जिन लोगो ने तेंदुए को प्रकृति में स्वच्छन्द रूप से घूमते नहीं देखा, वो उसकी खूबसूरती की कल्पना ही नहीं कर सकते। उसके रंगों की सुंदरता और उसकी चाल की मोहकता का अंदाजा नहीं लगा सकते।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के अधिकतर राज्यों में, विशेषकर मध्य भारत में, तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। तेंदुए की सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र सबसे ऊपर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि तेंदुए पूरी दुनिया में वर्षों से खतरों का सामना करते आ रहे हैं, दुनिया भर में उनके हैबिटेट को नुकसान हुआ है। ऐसे समय में भारत ने तेंदुए की आबादी में लगातार बढ़ोत्तरी कर पूरे विश्व को रास्ता दिखाया है।

जब रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2020 की आखिरी मन की बात कर रहे थे, तो उसी समय दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान थाली बजा रहे थे। गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने मन की बात शुरू होते ही हाथों में ड्रम और थालियां लेकर बजाना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि, मोदी जी के मन की बात का हम विरोध करते हैं। सरकार जब तक कानून वापस नहीं लेती, हम इसी तरह प्रधानमंत्री का विरोध करते रहेंगे।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रिय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि, जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोरोना थाली बजाने से भागेगा, उसी तरह किसान भी थाली बजा रहें हैं ताकि कृषि कानूनों को भगाया जाए। उन्होंने आगे कहा कि, ये बस सरकार के लिए सुधार संकेत है कि सरकार जल्द सुधर जाए। 29 दिसंबर को हम सरकार के साथ मुलाकात करेंगे। वहीं नया साल सबके लिए शुभ हो और मोदी जी भी कानून वापस ले लें तो हम किसान भाइयों के लिए भी शुभ हो। दरअसल किसानों ने 29 दिसंबर को सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं इस वार्ता में 4 मुद्दों का एजेंडा भी तय किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के दौरान गुरु गोविंद जी के पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह के बलिदान को याद किया। उन्होंने साहिबजादों के कम उम्र में साहस दिखाने की सराहना करते हुए कहा कि पुरानी सभ्यता और संस्कृति बचाने के लिए देश में बड़े-बड़े बलिदान दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात के दौरान कहा, हमारे देश में आतताइयों से, अत्याचारियों से, देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज को बचाने के लिए, कितने बड़े बलिदान दिए गए हैं, आज उन्हें याद करने का भी दिन है। आज के ही दिन गुरु गोविंद जी के पुत्रों, साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, लेकिन हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई। दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन फिर भी वो टस से मस नहीं हुए।
 

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