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कोरोना से उद्योग जगत को आया रोना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने 200 अरब डॉलर राहत पैकेज की जरूरत

कोरोना से उद्योग जगत को आया रोना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने 200 अरब डॉलर राहत पैकेज की जरूरत

हाईलाइट

  • अगले तीन महीनों में 50-100 अरब डॉलर एकमुश्त नकदी की जरूरत
  • जीएसटी में तीन महीने के लिए 50 फीसदी दर कम करने पर विचार करना चाहिए
  • एसोचैम ने 16 बिंदु एजेंडा की सिफारिश सरकार को भेजी है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उद्योग निकाय एसोचैम ने कहा है कि अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के प्रभाव के कारण सबसे गहरी वैश्विक मंदी को विफल करने के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत है। एसोचैम ने केंद्र से भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अगले 12 से 18 महीनों में कम से कम 200 से 300 अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज के लिए आग्रह किया है।

अगले तीन महीनों में नकदी की जरूरत:
एसोचैम ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कम से कम 200 अरब डॉलर की प्रोत्साहन राशि की आवश्यकता है। अगले तीन महीनों में 50-100 अरब डॉलर एकमुश्त नकदी की जरूरत है। यह नकदी नौकरियों और आय के नुकसान की भरपाई करने के लिए होगी। सरकार को जीएसटी में तीन महीने के लिए 50 फीसदी और वित्तीय वर्ष के लिए 25 फीसदी दर कम करने पर विचार करना चाहिए।

सरकार को भेजी 16 बिंदु एजेंडा सिफारिश:
एसोचैम ने दुनिया के इतिहास में सबसे गहरी वैश्विक मंदी में से एक को विफल करने के लिए 16 बिंदु एजेंडा की सिफारिश सरकार को भेजी है। एसोचैम के महासचिव दीपक सूद के अनुसार, चैंबर का मानना है कि दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 10 फीसदी प्रोत्साहन उपायों को ध्यान में रखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को 200 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी। साथ ही इसके अगले 12 से 18 महीनों में 300 अरब डॉलर तक जाने की क्षमता भी होनी चाहिए।

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एक बड़े पैकेज की घोषणा जल्द:
इसके साथ ही उद्योग चैंबर ने कहा कि अगले तीन महीनों में अर्थव्यवस्था में 50 से 100 अरब डॉलर की नकदी डालने की जरूरत होगी, ताकि नौकरियों और आय में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। बता दें कि कोरोना से निपटने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्दी ही एक बड़े पैकेज की घोषणा कर सकती है। यह पैकेज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा हाल ही में जारी राहत पैकेज से भी बड़ा होनी की संभावना है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।