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Retail Inflation & IIP: दिसंबर में खुदरा महंगाई दर घटकर 4.59% पर पहुंची , इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन निगेटिव जोन में


हाईलाइट

  • फूड प्रोडक्ट की घटी कीमतों के कारण दिसंबर में खुदरा महंगाई दर में गिरावट
  • खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के 6.93% से घटकर 4.59% हो गई
  • नवंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन निगेटिव जोन में

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फूड प्रोडक्ट की घटी कीमतों के कारण दिसंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के  6.93% से घटकर 4.59% हो गई। फूड प्रोडक्ट की महंगाई दर नवंबर में 9.43% थी जो दिसंबर में घटकर 3.41% हो गई। अर्थव्यवस्था के एक अन्य प्रमुख बैरोमीटर, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन निगेटिव जोन में है। नवंबर में इसमें 1.9 प्रतिशत का कॉन्ट्रेक्शन आया है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टरों का लोअर आउटपुट है। 

इनमें हुई बढ़ोतरी और इनमें आई गिरावट 
सेंट्रल स्टेटस्टिक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन नवंबर के 6.93% के मुकाबले दिसंबर में घटकर 4.59% पर पहुंच गया। सब्जियों की महंगाई दर भी 15.63% से घटकर -10.41% हो गई है। दालों की महंगाई दर 17.91% के मुकाबले घटकर 15.98% हो गई। अनाज की महंगाई दर 2.32% के मुकाबले घटकर 0.98% हो गई है। वहीं, महीने दर महीने के आधार पर फ्यूल एंड लाइट इन्फ्लेशन नवंबर के 1.90% के मुकाबले बढ़कर 2.99% हो गई है। हाउसिंग इंफ्लेशन 3.19% थी जो नवंबर में बढ़कर 3.21% पर पहुंच गई। कपड़ों और जूतों की महंगाई दर 3.30% के मुकाबले बढ़कर 3.3.49% हो गई।

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और एजुकेशन, कम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है।

महीने-दर-महीने आधार पर आईआईपी का सेक्टर वाइज ब्रेकअप
-माइनिंग सेक्टर में नवंबर में कॉन्ट्रेक्शन 1.5% से बढ़कर 7.3% हो गया।
-मैन्युफैक्टरिंग सेक्टर में 3.5% ग्रोथ के मुकाबले 1.7% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-इलेक्ट्रिस्टी सेक्टर में 11.2% ग्रोथ के मुकाबले 3.5% की ग्रोथ रही।
-प्राइमरी गुड्स में 3.3% कॉन्ट्रेक्शन के मुकाबले 2.6% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-कैपिटल गुड्स में 3.3% ग्रोथ के मुकाबले 7.1% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-इंटरमीडिएट गुड्स में 0.8% की ग्रोथ के मुकाबले 3% कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स में 7.8% ग्रोथ के मुकाबले केवल 0.7% की ग्रोथ रही।
-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 17.6% ग्रोथ के मुकाबले % का कॉन्ट्रेक्शन रहा।
-कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल्स में 7.5% ग्रोथ के मुकाबले 0.7% का कॉन्ट्रेक्शन रहा।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।