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महंगाई: देश में एक अप्रैल से 6 प्रतिशत महंगे बिकेंगे मोबाइल फोन, केंद्र सरकार ने 12% से बढ़ाकर 18% किया जीएसटी

महंगाई: देश में एक अप्रैल से 6 प्रतिशत महंगे बिकेंगे मोबाइल फोन, केंद्र सरकार ने 12% से बढ़ाकर 18% किया जीएसटी

हाईलाइट

  • कोरोना वायरस के कारण चीन से मोबाइल कंपोनेंट की आपूर्ति प्रभावित
  • 5 प्रतिशत सस्ता होगा विमानों का रखरखाव
  • दो करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले करदाताओं को विलंब शुल्क से छूट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में अब एक अप्रैल से मोबाइल फोन खरीदना महंगा हो जाएगा, क्योंकि इस पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दी गई है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 39वीं बैठक में शनिवार को यह फैसला लिया गया। कोरोनावायरस के चलते चीन से मोबाइल कंपोनेंट की आपूर्ति प्रभावित होने से पहले ही हैंडसेट कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी की बात कर रही है। कुछ ब्रांड के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की कीमतों में पहले से ही तेजी देखने को मिल रही है।

दूसरी ओर सरकार ने हाथ से बनी और मशीन से बनी हर तरह की माचिस पर जीएसटी की दर बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी है। निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस समय मोबाइल फोन और इसके खास पुर्जो पर जीएसटी की दर 12 फीसदी है। परिषद ने इन दोनों पर जीएसटी दर बढ़ा कर 18 फीसदी करने पर सहमति दी है। 

केंद्र एवं राज्यों के जीएसटी अधिकारियों की फिटमेंट कमेटी ने मोबाइल फोन, फुटवेयर, टेक्सटाइल्स एवं फर्टिलाइजर्स जैसे मदों पर शुल्क की उल्टी संरचना (इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) को दुरुस्त करने के लिए जीएसटी दर संरचना में बदलाव की सिफारिश की थी। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से मतलब ऐसी कर संरचना से है, जहां तैयार उत्पादों के मुकाबले इनपुट पर कर की ऊंची दर से है। इसके फलस्वरूप विभिन्न प्रशासनिक व अनुपालन संबंधी मसलों के अलावा वस्तुओं के लिए अधिक इनपुट क्रेडिट का दावा किया जाता है।

5 प्रतिशत सस्ता होगा विमानों का रखरखाव
हालांकि जीएसटी परिषद ने विमानों की रखरखाव व मरम्मत यानी मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) सेवा पर जीएसटी दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी है। जीएसटी परिषद की यहां बैठक के बाद वित्तमंत्री ने कहा कि इस बदलाव से भारत में एमआरओ सेवा स्थापित करने में मदद मिलेगी।

छोटे कारोबारियों को मिली राहत
जीएसटी परिषद ने कारोबारियों को सहूलियत देने के लिए कई उपाय किए। इन उपायों के मुताबिक, जीएसटी भुगतान में विलंब होने पर ब्याज नेट टैक्स कैश लायबिलिटी पर लिया जाएगा, जो कि एक जुलाई 2017 से ही लागू होगा। इसके लिए जीएसटी कानून में संशोधन किया जाएगा। जिनका पंजीकरण 14 मार्च, 2020 तक रद्द कर दिया गया है, वे पंजीकरण निलंबन निरस्त कराने के लिए इस साल जून तक आवेदन कर सकते हैं। वहीं, हर पंजीकृत व्यक्ति को उसके आपूर्तिकर्ता के संबंध में जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए समर्थ बनाने के मकसद से अपने आपूर्तिकर्ता को जानिए की एक नई सुविधा शुरू की जाएगी।

दो करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले करदाताओं को विलंब शुल्क से छूट
एमएसएमई सेक्टर को राहत प्रदान करने के लिए जीएसटी परिषद ने वित्तवर्ष 2018-19 से जून 2020 के लिए सालाना रिटर्न व समाधान विवरण दाखिल करने की तिथि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही, दो करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर वाले करदाताओं पर वित्तवर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए सालाना रिटर्न व समाधान विवरण दाखिल करने में विलंब होने पर विलंब शुल्क नहीं लगेगा।

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