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कंपनियों द्वारा निदेशकों को किया जाने वाला भुगतान अब जीएसटी के दायरे में

June 11th, 2020 17:30 IST
 कंपनियों द्वारा निदेशकों को किया जाने वाला भुगतान अब जीएसटी के दायरे में

हाईलाइट

  • कंपनियों द्वारा निदेशकों को किया जाने वाला भुगतान अब जीएसटी के दायरे में

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। कंपनियों के निदेशकों को पेशेवर शुल्क और पारिश्रमिक के तौर पर किया जाने वाला भुगतान अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में होगा। सरकार संग्रह बढ़ाने के लिए कराधान प्रणाली की खामियों को दूर करने में जुटी हुई है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि कंपनियों द्वारा स्वतंत्र निदेशकों या गैर कार्यकारी निदेशकों (कंपनी के कर्मचारी नहीं) को किया जाने वाला भुगतान जीएसटी की लागू दर के अधीन होगा।

सीबीआईसी ने कहा है कि इस तरह के निदेशकों को उनकी सेवा के एवज में किए जाने वाले भुगतान पर कंपनियां रिवर्स चार्ज के आधार पर टैक्स काटेंगी।

इसके अलावा पूर्णकालिक निदेशकों या जो निदेशक कंपनी के कर्मचारी भी हैं, उन्हें वेतन के अलावा दिया जाने वाला पारिश्रमिक भी जीएसटी के सशर्त अधीन होगा।

इसका मतलब यह कि निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, प्रबंध निदेशक, जो किसी कंपनी के रोल पर भी हैं और वेतन लेते हैं, वे यदि किसी तरह ्र का ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं जो वेतन की प्रकृति का नहीं है तो वह जीएसटी के अधीन होगा। हालांकि इस तरह के निदेशकों को भुगतान किए जाने वाले वेतन पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।

सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर, मेखला आनंद ने कहा, विभिन्न कानूनों के तहत निदेशकों को किए जाने वाले पारिश्रमिक भुगतान की प्रकृति को बताने वाले इस स्पष्टीकरण से, विविध एएआर रूलिंग्स के बीच उलझी कंपनियों को एक अभूतपूर्व स्पष्टता प्राप्त होगी। इस मुद्दे के समाधान से उद्योग को सही संकेत जाएगा, जो कोविड-19 संकट के बाद अपनी रफ्तार वापस हासिल करने पर ध्यान दे रहा है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।