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मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट के दाम बढ़ने से अक्टूबर में थोक महंगाई 8 माह के टॉप पर, खाने-पीने के सामानों की कीमतें घटी

November 16th, 2020 15:44 IST
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट के दाम बढ़ने से अक्टूबर में थोक महंगाई 8 माह के टॉप पर, खाने-पीने के सामानों की कीमतें घटी

हाईलाइट

  • थोक महंगाई दर अक्टूबर में आठ महीने के उच्च स्तर 1.48 फीसदी पर पहुंच गई
  • सितंबर में यह 1.32 फीसदी और पिछले साल अक्टूबर में शून्य फीसदी रही थी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। थोक महंगाई दर अक्टूबर में आठ महीने के उच्च स्तर 1.48 फीसदी पर पहुंच गई है। सितंबर में यह  1.32 फीसदी और पिछले साल अक्टूबर में शून्य फीसदी रही थी। यह थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) का फरवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है जब यह 2.26 फीसदी थी। जहां विनिर्मित चीजों की कीमतें बढ़ी हैं, वहीं खाने की चीजों की कीमतों में अक्टूबर में नरमी आई है।

 वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक खाद्य महंगाई अक्टूबर में 6.37 फीसदी रही जो पिछले महीने में 8.17 फीसदी पर थी। सब्जियों और आलू के दाम में बढ़ोतरी ऊंचे स्तर पर बनी रही। आलू की कीमतों में अक्टूबर के दौरान 107.70 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जोकि सितंबर में 107.63 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं, प्याज के दाम में अक्टूबर में 8.49 फीसदी की वृद्धि रही जबकि सितंबर में 31.64 फीसदी की वृद्धि रही। इसी प्रकार दालों के दाम में अक्टूबर में 15.93 फीसदी की वृद्धि रही जबकि सितंबर में 12.53 फीसदी दर्ज की गई थी। गैर-खाद्य चीजों और खनिजों की महंगाई क्रमश: 2.85 फीसदी और 9.11 फीसदी के ऊंचे स्तर पर रही।

विनिर्मित उत्पाद की श्रेणी में, महंगाई अक्टूबर में 2.12 फीसदी पर रही, जो सितंबर में 1.61 फीसदी पर थी। अक्टूबर में तेल और पावर में कीमतें नरमी के साथ (-) 10.95 फीसदी पर पहुंच गईं। पिछले हफ्ते जारी हुए डेटा में पता चला था कि खुदरा महंगाई जो कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स पर आधारित है, वह अक्टूबर में 7.61 फीसदी थी। खुदरा महंगाई का यह स्तर लगभग साढ़े 6 साल का हाई है। इससे पहले खुदरा महंगाई का सबसे उच्च स्तर मई 2014 में दर्ज किया गया था, जो कि 8.33 फीसदी है। सितंबर 2020 में खुदरा महंगाई 7.27 फीसदी के स्तर पर रही थी। अक्टूबर 2019 में खुदरा महंगाई 4.62 फीसदी दर्ज की गई थी।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।