No UPI Day: 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे देशभर के व्यापारी, MDR के खिलाफ नकद भुगतान की करेंगे अपील

2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाएंगे देशभर के व्यापारी, MDR के खिलाफ नकद भुगतान की करेंगे अपील
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाने की घोषणा की है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा UPI मर्चेंट लेनदेन के लिए नए MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) ढांचे का विरोध देशभर में फैलता जा रहा है। 23 सितंबर को मध्य प्रदेश में व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। वहीं अब फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाने की घोषणा की है। इसके तहत कई दुकानों पर UPI से भुगतान की सुविधा बंद रखने की तैयारी है। कहा जा रहा है कि, विरोध के दौरान व्यापारी अपने QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स जैसे डिवाइस को काले कपड़े से ढक सकते हैं। साथ ही इस दिन व्यापारी ग्राहकों से नकद या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से भुगतान करने की अपील करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस देश में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़ी संख्या में लोग रोजाना यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं। लेकिन, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.40 प्रतिशत MDR लिया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्र सरकार ने हाल ही में किया था। इसके बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया है।

व्यापारी संगठनों ने एमडीआर लगाए जाने की नई व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि हर डिजिटल लेनदेन पर व्यापारी से शुल्क लिया जाता है तो इसका असर खास तौर पर थोक कारोबारियों पर पड़ेगा। क्योंकि, यहां लगभग पेमेंट की राशि 2 हजार रुपए से अधिक होती है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का निर्णय लिया है।

2 अक्टूबर को क्या होगा?

‘नो यूपीआई डे’ के तहत व्यापारी ग्राहकों को इस अभियान के बारे में जानकारी देने और यूपीआई के बजाय नकद भुगतान करने की अपील कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग व्यापारी संगठन और बाजार इस अभियान में किस तरह शामिल होंगे, यह स्थानीय स्तर पर अलग हो सकता है। बता दें कि, 23 सितंबर को UPI शुल्क के खिलाफ मध्य प्रदेश के व्यापारी संगठनों ने नो यूपीआई डे मनाया था। वहीं 2 अक्टूबर को यूपीआई लेनदेन बंद रखने की घोषणा के बाद इस अभियान को अलग-अलग क्षेत्रों के कारोबारी संगठनों का समर्थन मिलता नजर आने लगा है। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर ने भी आंदोलन का साथ देने की बात कही है।

क्या है MDR शुल्क?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से लिया जाता है। नई व्यवस्था के अनुसार चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन में 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपए के भुगतान पर 40 रुपए MDR बनता है। हालांकि, यह शुल्क सीधे ग्राहक से UPI चार्ज के रूप में नहीं लिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार ग्राहक को दुकान पर 10,000 रुपए का UPI भुगतान करने पर अलग से 40 रुपए नहीं देने होंगे।

Created On :   24 Sept 2026 6:30 PM IST

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