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अनूठी शाही बारात: ढोल-ताशों की गूंज, रोशनी से जगमग सड़कें और हाथी पर सवार दुल्हन, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी राजदरबार जैसी भव्यता

Amravati News. रात का आलम रंग-बिरंगी रोशनियों से नहा चुका था। सड़कों पर फूलों की खुशबू फैली थी और ढोल-ताशों की गूंज दूर तक सुनाई दे रही थी। हर कोई ठहरकर इस नजारे को देखना चाहता था, जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लग रहा था। शहर की व्यस्त सड़कें अचानक राजदरबार जैसी भव्यता में बदल गई थीं।
ये मौका था श्री रुक्मिणी विदर्भ पीठ, कौंडण्यपुर के जगद्गुरु स्वामी राम राजेश्वराचार्य माऊली सरकार की मानस पुत्री के विवाह समारोह का, जिसने पूरे शहर का ध्यान मानो अपनी ओर खींच लिया। शिवानी देशमुख का विवाह यवतमाल निवासी गौरव मोर के साथ शाही अंदाज में संपन्न हुआ।
बारात जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी। गाजे और बाजे की ताल पर थिरकते श्रद्धालु, पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग और चमचमाती रोशनियों के बीच जब हाथी पर सवार दुल्हन दिखाई दी, तो हर नजर कुछ पल के लिए वहीं ठहर गई।
सजी-धजी शाही पोशाक में दुल्हन किसी राजघराने की राजकुमारी जैसी लग रही थी। हाथी को भी रंगीन कपड़ों, सुनहरी सजावट और आकर्षक आभूषणों से भव्य रूप दिया गया था। उसके ऊपर लगे विशाल छत्र ने पूरे दृश्य को और भी राजसी अंदाज में निखार दिया। ऐसा लग रहा था मानो किसी प्राचीन भारतीय राजपरिवार की परंपरा आधुनिक शहर की सड़कों पर जीवंत हो उठी हो।
बारात के आगे-आगे ढोल-ताशों की धुनों पर युवा चल रहे थे। कहीं शहनाई की मधुर आवाज माहौल को आध्यात्मिक बना रही थी, तो कहीं आतिशबाजी आसमान को रोशन कर रही थी। सड़क किनारे खड़े लोग अपने मोबाइल कैमरों में इस अनोखे पल को कैद करने में व्यस्त दिखाई दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर चेहरे पर उत्साह और कौतूहल साफ झलक रहा था।
समारोह में पारंपरिक भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक आस्था का विशेष संगम देखने को मिला। विवाह आयोजन में शामिल साधु-संतों, श्रद्धालुओं और अतिथियों ने भी इस शाही बारात को यादगार बताया।
इस तरह हाथी पर निकली दुल्हन की बारात ने न केवल लोगों को अपनी ओर खींचा, बल्कि शहरवासियों को वर्षों बाद ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पुरानी शाही परंपराओं की याद ताजा कर दी। यह विवाह समारोह देर रात तक चर्चा का विषय बना रहा।
Created On :   7 May 2026 8:12 PM IST












