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Amravati News: कलेक्टर कक्ष से हटाया गया जनता से मिलने का समय-सीमा वाला बोर्ड
- बोले बावनकुले-जनता से दूरी बर्दाश्त नहीं
- लापरवाह अधिकारियों की सीआर होगी खराब
Amravati News राज्य के राजस्व मंत्री एवं अमरावती जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जनहित से जुड़े एक गंभीर मुद्दे पर जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। दैनिक भास्कर द्वारा उठाई गई शिकायत को संज्ञान में लेते हुए पालकमंत्री ने जिलाधिकारी को स्पष्ट शब्दों में समझाइश दी, जिसके तुरंत बाद कलेक्टर कार्यालय के बाहर लगाया गया वह विवादास्पद फलक हटा दिया गया, जिसमें नागरिकों से मिलने का समय केवल सोमवार और शुक्रवार दोपहर 12 से 2 बजे तक सीमित किया गया था।
शनिवार को आयोजित पत्रकार परिषद में दैनिक भास्कर ने पालकमंत्री के समक्ष यह मामला उठाया कि जिलाधिकारी द्वारा जनता से मिलने के लिए केवल दो दिन और सीमित समय तय करने से मेलघाट सहित दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग अपनी शिकायतें लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बावजूद बैरंग लौटने को मजबूर हो रहे थे, जिससे सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ रहा था।
पत्रकार वार्ता के तुरंत बाद पालकमंत्री बावनकुले ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस मुद्दे पर तीव्र नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वे स्वयं चौबीसों घंटे जनता के संपर्क में रहते हैं। “मैं देर रात तक लोगों से मिलता हूं। घर लौटते समय भी यदि कोई मिलने के लिए प्रतीक्षारत हो तो उससे भेंट करता हूं। मंत्रालय में भी देर रात तक जनता के लिए उपलब्ध रहता हूं और बाहर निकलते समय यह भी सुनिश्चित करता हूं कि कोई व्यक्ति बिना मिले न लौटे,” उन्होंने कहा।
पालकमंत्री ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेताते हुए कहा कि जब सरकार जनता की समस्याएं सुनने के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराती है, तब अधिकारियों को जनता से मिलने में आखिर क्या आपत्ति है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो अधिकारी जनहित में अच्छा कार्य करेंगे, उनकी वे खुलकर हौसला-अफजाई करेंगे, लेकिन जो अधिकारी जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ेंगे, उनका गोपनीय प्रतिवेदन (सीआर) खराब करने का अधिकार भी उनके पास है। इस दौरान पालकमंत्री ने कलेक्टर कक्ष के बाहर दोनों ओर लगाए गए उस फलक को तत्काल हटाने के निर्देश दिए, जिसमें नागरिकों से मिलने का समय सीमित किया गया था। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी को नियमित रूप से जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करने और उसकी जानकारी सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए।
पालकमंत्री का रौद्र रूप देखकर बैठक में मौजूद जिला प्रशासन के अधिकारी स्तब्ध रह गए। इस घटनाक्रम को प्रशासन के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। स्पष्ट चेतावनी दी गई कि जो अधिकारी जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई से जनता में यह संदेश गया है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर किसी भी स्तर की उदासीनता को स्वीकार नहीं करेगी।
Created On :   27 Jan 2026 1:56 PM IST















