- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- बालाघाट
- /
- 8 मौतों के बाद जागा सिस्टम, अब हर...
Balaghat News: 8 मौतों के बाद जागा सिस्टम, अब हर बैगा की होगी स्क्रीनिंग

डिजिटल डेस्क,बालाघाट। बिरसा के बैगा बहुल गांवों में बीमारी से 8 मौतों के बाद अब प्रशासन से लेकर राजनीतिक दलों तक की सक्रियता बढ़ गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त धनराजू एस बीमारी प्रभावित कुंडेकसा, मछुरदा, गठिया, बोंदारी और घुम्मुर पहुंचे। उन्होंने कुंडेकसा के अस्थाई अस्पताल में मरीजों से मुलाकात की और स्वास्थ्य विभाग की टीमों से उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे और ग्रामीणों से हालात जाने।
हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग के निर्देश
बैहर सिविल अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर आयुक्त ने प्रभावित गांवों के एक-एक व्यक्ति की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता और बीमारी के लक्षण दिखने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक करने को कहा। बिठली और सोनगुड्डा पीएचसी का भी निरीक्षण कर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति देखी।
कुंडेकसा में अस्थाई अस्पताल, मरीजों से पूछा-इलाज कैसा मिल रहा
कुंडेकसा में बीमारी प्रभावित लोगों की जांच और उपचार के लिए बनाए गए अस्थाई अस्पताल में आयुक्त ने भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत की। उन्होंने उनकी तबीयत जानी और अधिकारियों से दवाओं, जांच और उपचार की उपलब्धता की जानकारी ली। मछुरदा, गठिया, बोंदारी और घुम्मुर में ग्रामीणों से भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पूछीं।
नेता प्रतिपक्ष समेत विधायक भी गांवों में
बीमारी की गंभीरता के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कांग्रेस जिला अध्यक्ष व बैहर विधायक संजय उइके, वारासिवनी विधायक विवेक पटेल, परसवाड़ा विधायक मधु भगत पटेल, बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे और वारासिवनी विधायक प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह राजपूत के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे। नेताओं ने ग्रामीणों से बातचीत कर बीमारी, उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।
13 अगस्त के रिकॉर्ड में कई गांवों के मरीज जिला अस्पताल में
स्वास्थ्य विभाग के 13 अगस्त के रिकॉर्ड में घुम्मुर, कुंडेकसा, बोंदारी, गठिया, मटला और भंडेरी के मरीज जिला अस्पताल बालाघाट में ‘अंडर ट्रीटमेंट’ दर्ज हैं। रिकॉर्ड में 10 माह और 3 वर्ष की उम्र के बच्चों समेत अलग-अलग आयु वर्ग के मरीज शामिल हैं। इससे साफ है कि बीमारी का असर एक गांव तक सीमित नहीं है।
जून में शुरू हुई बीमारी, अगस्त में बढ़ी चिंता
बीमारी के सामने आने के बाद जून से अब तक हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सके। जुलाई के अंत तक मौतों का सिलसिला जारी रहा और अगस्त में संख्या 8 तक पहुंच गई। इसके बाद स्वास्थ्य अमले की सक्रियता बढ़ी है। अब प्रभावित गांवों में घर-घर स्क्रीनिंग और मरीजों की पहचान पर जोर दिया जा रहा है।
Created On :   14 Aug 2026 7:25 PM IST










