क्राइम सीन से कोर्टरूम तक: आरएनटीयू के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ने फोरेंसिक एविडेंस और क्रिमिनल जस्टिस पर एक्सपर्ट सेशन का किया आयोजन

आरएनटीयू के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ने फोरेंसिक एविडेंस और क्रिमिनल जस्टिस पर एक्सपर्ट सेशन का किया आयोजन
“क्राइम सीन से कोर्टरूम तक”: आरएनटीयू में फोरेंसिक साक्ष्य और आपराधिक न्याय पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित, विद्यार्थियों ने कानूनों के व्यावहारिक पहलुओं को समझा

भोपाल: रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (आरएनटीयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ने विश्वविद्यालय के शारदा ऑडिटोरियम में “क्राइम सीन से कोर्टरूम तक: BNS, BNSS और BSA के तहत फोरेंसिक एविडेंस, क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन और प्रॉसिक्यूशन, 2023” टाइटल से एक्सपर्ट सेशन का आयोजन किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भोपाल के EOW में DPO अभिषेक बुंदेला, MP MLA कोर्ट के विशेष अभियोजन अधिकारी आशीष दुबे और मेडिको-लीगल इंस्टीट्यूट, भोपाल के पूर्व निदेशक डॉ. डी.एस. बड़कुर शामिल हुए।

सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को फोरेंसिक साक्ष्य, आपराधिक जांच, अभियोजन और भारत में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था। इस दौरान आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रभावी संचालन में वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य संबंधी प्रक्रियाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने अपने पेशेवर अनुभव साझा करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की भूमिका के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और आपराधिक कानूनों तथा आपराधिक न्याय प्रणाली के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की। सत्र का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषज्ञ वक्ताओं, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और सहयोगी कर्मचारियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. रवि प्रकाश दुबे ने कहा कि वर्तमान आपराधिक न्याय व्यवस्था में वैज्ञानिक जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे विशेषज्ञ सत्र विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को कानून के बदलते स्वरूप और उसकी व्यावहारिक चुनौतियों से परिचित कराया जाए।

वहीं, कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी ने कहा कि विधि शिक्षा केवल कानूनों के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और उसके व्यावहारिक पहलुओं की समझ भी उतनी ही आवश्यक है। BNS, BNSS और BSA जैसे नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ में आयोजित यह सत्र विद्यार्थियों को समकालीन कानूनी व्यवस्था को समझने में मददगार साबित होगा।

कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के डीन प्रो. डॉ. नीलेश शर्मा और डिपार्टमेंट ऑफ लॉ की डॉ. नाइश जमीर के मार्गदर्शन में किया गया। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. माधवी पाटकर और असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्यांश भार्गव ने सह-संयोजक की भूमिका निभाई। उनके समन्वय और सामूहिक प्रयासों से सत्र का आयोजन संपन्न हुआ।

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