- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- छिंदवाड़ा
- /
- संकल्प की हरियाली, 700 एकड़ की बंजर...
पर्यावरण दिवस विशेष: संकल्प की हरियाली, 700 एकड़ की बंजर पहाड़ी बनी घना जंगल

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर उमरिया ईसरा गांव के किशनलाल ने 30 वर्ष पहले गांव की बंजर पहाड़ी को हराभरा करने का सपना देखा था। पहले अकेले ही पहाड़ी को हराभरा करने जुटे। बाद में वर्ष 1995-96 में वन समिति का गठन हुआ। जिससे किशनलाल के जज्बे को बल मिला।
गांव के लोग भी जुटे और इस कार्य में सहयोग दिया। पौधे रोपने के साथ किशनलाल ने ग्रामीणों के साथ मिलकर करीब 700 एकड़ की बंजर पहाड़ी पर पौधों में पानी देने व देखरेख का बीड़ा उठाया।
देखते-देखते बंजर पहाड़ी हरियाली में तब्दील हो गई। किशनलाल तो इस दुनिया में रहे नहीं लेकिन घने जंगल का रूप ले चुकी पहाड़ी पर्यावरण संरक्षण के लिए की गई उनकी पहल को अमर बनाए हुए है।
बैलगाड़ी पर ड्रम रख पौधों को पानी दिया:
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि शुरूआती दौर में पानी की समस्या रहती थी जिस पर किशनलाल अकेले ही बैलगाड़ी पर ड्रम रखकर पौधों को सींचा करते थे। उनकी पहल पर धीरे-धीरे ग्रामीण भी जुट गए। पौधे रोपना और फिर उसके पोषण के साथ रखवाली करने का जिम्मा पूरे गांव ने उठा लिया।
बाद में बनी समिति, सदस्यों ने भी रूचि दिखाई:
वर्ष 1995-96 में ग्रामवन समिति उमरिया ईसरा का गठन हुआ जिसमें पहले अध्यक्ष किशनलाल बने। ग्राम वन समिति से जुड़े लोगों के अनुसार यहां पर सबसे पहले सागौन के पौधे लगाए गए और इनकी देखभाल के लिए समिति अध्यक्ष के अलावा ग्राम के हर एक सदस्य को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई और हर दिन एक सदस्य इन पौधों की रखवाली करता था। गड्ढे खोदने से पौधे लगाने तक की जिम्मेदारी भी वन समिति यानी गांव के ही लोगों ने उठाई, जनभागीदारी के जरिए वे मजदूरी भी कम लेते थे।
ये आया बदलाव
- गठन के समय से समिति को आवंटित वनक्षेत्र के घनत्व में 0.3 से 0.6 की वृद्धि हुई।
- वन्यप्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई।
- घास एवं चारे की पर्याप्त उपलब्धता हुई जिससे करीब 30 प्रतिशत परिवार दुग्ध उत्पादन के व्यवसाय से रोजगार में लगे हुए है।
- मुर्गीपालन और मछली पालन का व्यवसाय मिला।
- जलसंसाधन के विकास से आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
खुद विकसित किए गए जंगल ने दिलाई गांव को पहचान:
ग्रामीणों द्वारा विकसित किया गया जंगल अब गांव की पहचान बन गया है। यहां ग्राम वन समिति का काम पौधरोपण या फिर जंगलों की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहा है। समिति को जंगलों से होने वाली आय का कुछ हिस्सा ग्राम विकास के लिए भी खर्च किया जा रहा है। जिसमें गांव में स्कूल बिल्डिंग, डेम, सडक़ सहित अन्य काम ग्राम वन समिति, ग्राम पंचायत और फॉरेस्ट विभाग के साथ मिलकर कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य संस्थाएं भी यहां पर आती है।
इनका कहना है
- स्व किशनलाल मेेरे पिता है जिन्होंने वर्ष 1995-96 से उजाड़ पहाड़ी को संवारने का संकल्प लिया। उस समय पानी की समस्या रहती थी बैलगाड़ी से पानी लेकर जंगल जाते थे। समिति में और भी ग्रामीण जुड़े और आज सभी की मेहनत का नतीजा है कि सागौन बांस के पेड़ तैयार हो गए है। घना जंगल होने के कारण यहां पर वन्यप्राणी टाईगर, मोर, चीतल, हिरण भी है। तकरीबन 700 एकड़ में यह जंगल बन गया है इसमें सभी ग्रामीणों का साथ मिला है।
- परमान शाह उईके, अध्यक्ष, ग्राम वन समिति उमरिया ईसरा
Created On :   5 Jun 2026 1:33 PM IST












