Chhindwara News: जिले में लगभग 227 ब्रेस्ट कैंसर के मरीज, बावजूद इसके पिछले तीन सालों से धूल फांक रही लाखों की मशीन

जिले में लगभग 227 ब्रेस्ट कैंसर के मरीज, बावजूद इसके पिछले तीन सालों से धूल फांक रही लाखों की मशीन
ब्रेस्ट कैंसर की जांच ठप...मेमोग्राफी मशीन है, टेक्निशियन है, लेकिन रिपाेर्टिंग करने रेडियोलॉजिस्ट नहीं

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगभग तीन साल पहले मेमोग्राफी मशीन स्थापित की गई थी। मेमोग्राफी मशीन ब्रेस्ट कैंसर की शुरूआती अवस्था की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरकारी सिस्टम की अनदेखी के चलते लाखों रुपए कीमत की मेमोग्राफी मशीन धूल खा रही है।

अस्पताल में जांच करने के लिए प्रशिक्षित टेक्निशियन तो है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने से ब्रेस्ट कैंसर जैसी महत्वपूर्ण जांच नहीं हो पा रही है। रिपोर्टिंग न होने से मशीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेमोग्राफी जांच से बीमारी के शुरूआती लक्षण सामने आ जाते है। ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता चलने पर इलाज की सफलता की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। मेमोग्राफी जांच न होने का खामियाजा जिले की महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें समय पर जांच और इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को मेमोग्राफी जांच के लिए नागपुर या जबलपुर जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।

सोनोग्राफी के लिए भी जरुरी है रेडियोलॉजिस्ट

मेमोग्राफी जांच की सुविधा न होने से चिकित्सक सोनोग्राफी जांच की मदद लेते है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से यहां भी मरीजों को मशक्कत करनी पड़ रही है। मजबूरी में मरीजों को निजी सेंटरों से जांच करानी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज से संबद्धता के बाद जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन सुविधाएं अभी भी जस की तस है।

मेमाेग्राफी जांच के फायदे

- ब्रेस्ट कैंसर की शुरूआती पहचान- मेमोग्राफी से गांठ बनने से पहले या बहुत छोटे आकार में कैंसर का पता लग सकता है।

- समय पर इलाज शुरू होगा- बीमारी के शुरूआती चरण में कैंसर के लक्षण पता लगनेे पर प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा।

- दर्द रहित और त्वरित जांच- यह जांच कुछ मिनटों में पूरी हो जाती है और किसी सर्जरी की भी आवश्कता नहीं पड़ती।

- छोटी गांठाें का पता लगता है- ऐसी गांठें जो दिखाई नहीं देती और सामान्य जांच से पकड़ में नहीं आती।

- कैल्शियम जमाव की पहचान- यह कैंसर के शुरूआती संकेत हो सकते है, जिन्हें मेमोग्राफी आसानी से पहचान लेती है।

Created On :   18 Jun 2026 4:18 PM IST

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