Jabalpur News: इंदिरा आईवीएफ की बड़ी लापरवाही, ब्लड ग्रुप के घालमेल ने ली दो मासूमों की जान

इंदिरा आईवीएफ की बड़ी लापरवाही, ब्लड ग्रुप के घालमेल ने ली दो मासूमों की जान
मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर की भी लापरवाही उजागर, 6 माह पुराने मामले से जुड़ी जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पीड़ित परिवार को अब तक नहीं मिला न्याय

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। चिकित्सा के क्षेत्र में संवेदनहीनता और लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि चिकित्सा जगत की नैतिकता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। आईवीएफ से हुए जुड़वा बच्चों की मौत से जुड़े एक 6 माह पुराने मामले में हुई जांच में इंदिरा आईवीएफ और मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

शिकायतकर्ता रामराज पटेल ने अपने जुड़वा बच्चों की मौत से जुड़े मामले में मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर की लापरवाही को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से शिकायत कर जांच की मांग रखी थी, जिसके बाद तत्कालीन सीएमएचओ द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई गई।

जांच में जो बात प्रमुखता से सामने आई है, वह "ब्लड ग्रुप' के घालमेल से जुड़ी है, जो कि प्रेग्नेंसी के दौरान ही इंदिरा आईवीएफ द्वारा किया गया। बाद में जब बच्चों का जन्म हुआ, तो मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर द्वारा पीलिया के उपचार में भी लापरवाही बरती गई, जिससे दोनों नवजात बच्चों ने एक-एक कर दम तोड़ दिया।

13 वर्ष बाद जुड़वा बच्चों की मां बनी वंदना सहित पूरा परिवार इस घटना के सदमे से अब तक नहीं उबर सका है। जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद भी पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है।

क्या है पूरा मामला- शिकायतकर्ता रामराज पटेल की पत्नी वंदना पटेल का इलाज इंदिरा आईवीएफ सेंटर में चल रहा था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वंदना का ब्लड ग्रुप 2022 के दस्तावेजों में "AB पॉजिटिव' दर्ज था, जबकि 2024 की जांच में इसे "AB निगेटिव' पाया गया। हैरानी की बात यह है कि ब्लड ग्रुप में इस बड़े अंतर के बावजूद, इंदिरा आईवीएफ ने लापरवाही बरतते हुए वंदना का इलाज "AB पॉजिटिव' मानकर ही जारी रखा।

जांच रिपोर्ट में सामने आए मुख्य बिंदु

इंदिरा आईवीएफ ने ब्लड ग्रुप में अंतर होने के बावजूद प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

डॉ. सोनल द्वारा समय पर विशेषज्ञ शिशु रोग चिकित्सक को नहीं बुलाया गया।

यह स्पष्ट रूप से "Rh Incompatibility' का मामला था, जिसमें समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चों की मृत्यु हुई।

नहीं लगाया "Anti-D' इंजेक्शन

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यदि मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव हो और भ्रूण का पॉजिटिव, तो "Anti-D' इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है ताकि "Rh Incompatibility' की स्थिति पैदा न हो। रानी दुर्गावती चिकित्सालय के विशेषज्ञों डॉ. स्वाति नेमा, डॉ. वीणा जैन और डॉ. ममता गुप्ता की तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि इंदिरा आईवीएफ द्वारा न तो समय पर यह इंजेक्शन लगाया गया और न ही ब्लड ग्रुप की विसंगति पर ध्यान दिया गया।

अस्पताल में भी बरती गई लापरवाही

मामला तब और बिगड़ गया जब डिलीवरी के समय मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर की डॉ. सोनल रिछारिया ने मरीज की उचित केस हिस्ट्री नहीं ली। डिलीवरी के बाद बच्चे पीलिया की चपेट में थे। परिजनों ने बार-बार डॉक्टरों को बच्चों के पीले पड़ने की जानकारी दी, लेकिन डॉ. सोनल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और केवल धूप दिखाने की सलाह दी।

जब बच्चों की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। जांच में सामने आया कि बच्चों का बिलीरुबिन लेवल 46.1 mg/dl तक पहुंच गया था, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। गंभीर रूप से बीमार होने के कारण 19 और 20 सितंबर 2025 को दोनों बच्चों ने दम तोड़ दिया।

जांच रिपोर्ट भी दबाने का प्रयास

पीड़ित रामराज पटेल का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट बीते वर्ष नवंबर माह में ही आ गई थी, लेकिन उन्हें इससे अवगत नहीं कराया गया। चूंकि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की थी, तो शिकायत के निराकरण की जानकारी देने के लिए उन्हें सूचित किया गया। तब उन्हें जांच हो जाने का पता चला।

जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए उन्हें आईटीआई लगानी पड़ी, तब जाकर 25 फरवरी को उन्हें जांच रिपोर्ट मिली। पीड़ित परिवार अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

Created On :   5 May 2026 5:11 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story