Latur News: बम-बम भोले के जयघोष से गूंजेगी सिद्धेश्वर नगरी, यात्रा महोत्सव शुरू, भव्य महामेला

बम-बम भोले के जयघोष से गूंजेगी सिद्धेश्वर नगरी, यात्रा महोत्सव शुरू, भव्य महामेला
  • धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य श्रृंखला
  • महाशिवरात्रि पर लाखों भक्त करेंगे महादेव के दर्शन

Latur News, संजय बुच्चे। ग्रामदैवत श्री सिद्धेश्वर एवं रत्नेश्वर देवस्थान की ओर से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सिद्धेश्वर यात्रा महोत्सव का आयोजन किया गया है। आज 15 फरवरी से 2 मार्च तक चलने वाले इस 15 दिवसीय महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। देवस्थान प्रशासन ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं और नागरिकों से महोत्सव में सहभागी होने की अपील की है।

राज्यभर में प्रसिद्ध लातूर का यह यात्रा महोत्सव 15 फरवरी, महाशिवरात्रि के दिन शनिवार मध्यरात्रि तथा रविवार तड़के गवली समाज की ओर से भगवान श्री सिद्धेश्वर का दुग्धाभिषेक किया जाएगा, जिसके बाद दर्शन कार्यक्रम शुरू होगा।

रविवार सुबह 10 बजे जिलाधिकारी वर्षा ठाकूर-घुगे के हस्ते महापूजा एवं ध्वजारोहण के साथ महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ होगा। इसी दिन संत सावता माली भजनी मंडल व माली समाज की ओर से माली गली से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा पुष्पवर्षा की जाएगी। दोपहर 1 बजे मार्केट यार्ड स्थित गौरीशंकर मंदिर से पारंपरिक ध्वज यात्रा निकलेगी, जिसका समापन श्री सिद्धेश्वर मंदिर में होगा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।

कीर्तन और भजन की आध्यात्मिक श्रृंखला

15 फरवरी रात 9 से 11 बजे तक हभप श्री संजय महाराज खडक उमरगेकर का कीर्तन तथा रात 11 से 1 बजे तक सुरमणी बाबूराव बोरगांवकर एवं तालमणी रामभाऊ बोरगांवकर का संगीत भजन होगा।

16 फरवरी को वीरशैव तेली समाज की ओर से गंगाजल अभिषेक किया जाएगा तथा शाम को आळंदी के हभप श्री माऊली महाराज कदम का कीर्तन होगा।

17 फरवरी को हभप श्री ज्ञानसिंधु संदीपान महाराज हासेगांवकर तथा 18 फरवरी को हभप श्री पुंडलीक महाराज देहूकर का कीर्तन आयोजित है।

19 फरवरी को हभप श्री गुरुराज महाराज देगलुरकर और 20 फरवरी को पंढरपुर के हभप श्री गोपालअण्णा महाराज वासकर का कीर्तन होगा।

21 फरवरी को शाम 6 से 8 बजे तक हभप गुरुबाबा महाराज औसेकर का चक्रीभजन तथा रात 9 बजे हभप विजयानंद महाराज सुपेकर का कीर्तन होगा।

22 फरवरी को सुबह 11 से शाम 4 बजे तक 1001 महिलाओं की उपस्थिति में रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया है। महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी। रात 8 बजे शिवरुद्र स्वामी का संगीत भजन होगा।

23 से 26 फरवरी तक प्रतिदिन विविध भजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

26 फरवरी को सुबह 11 बजे कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन तथा देवस्थान परिसर में पशु-पक्षी प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा।

27 फरवरी को पशु, अश्व एवं श्वान प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। चयनित पशुओं को लातूर बाजार समिति की ओर से चांदी का रथ देकर सम्मानित किया जाएगा।


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कुश्ती, आतिशबाजी और शोभायात्रा से समापन

1 मार्च को श्री सिद्धेश्वर व रत्नेश्वर भजनी मंडल का भजन तथा सुबह 11:30 बजे से कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन होगा।

2 मार्च को रात 8 बजे उपविभागीय अधिकारी रोहिणी नऱ्हे की उपस्थिति में आतिशबाजी के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा। इसके बाद पंढरपुर के हभप माधव महाराज शिवणीकर का काल्याचे कीर्तन एवं श्री की शोभायात्रा निकाली जाएगी। दहीहंडी और महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया है।

आनंद मेला और विशेष आकर्षण

महोत्सव के दौरान आनंद मेला, विविध खाद्य पदार्थों तथा अन्य सामग्री के स्टॉल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। लातूर सहित अन्य जिलों एवं राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

रक्तदाताओं को मिलेगा सीधा दर्शन

महोत्सव के अवसर पर डॉ. भालचंद्र ब्लड बैंक की ओर से महाशिवरात्रि के दिन देवस्थान परिसर में रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। रक्तदान करने वाले दाताओं को सीधे दर्शन की सुविधा प्रदान की जाएगी। देवस्थान के प्रशासक सचिन जांबूतकर तथा सभी विश्वस्तों ने श्रद्धालुओं से उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया है।

सिद्धेश्वर और रत्नेश्वर मंदिर का इतिहास

महाराष्ट्र में स्थित सिद्धेश्वर और रत्नेश्वर मंदिर लातूर शहर की सुंदरता, भव्यता और धार्मिक वैभव को बढ़ाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इन मंदिरों का निर्माण राजा ताम्रध्वज ने सिद्धेश्वर मंदिर से जुड़े भगवान सिद्धारमेश्वर स्वामी के प्रति श्रद्धा स्वरूप करवाया था।

ये मंदिर लातूर शहर से लगभग 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित हैं। भगवान सिद्धारमेश्वर स्वामी लिंगायत वीरशैव संप्रदाय के प्रमुख संत थे। उन्होंने 12वीं शताब्दी में कन्नड़ भाषा में प्रभावशाली रचनाएँ कीं और वीरशैव आंदोलन को मजबूत किया।

ये मंदिर शैव परंपरा के सशक्त धार्मिक प्रतीक माने जाते हैं और हर वर्ष यहां विशाल यात्रा और मेला आयोजित होता है।

यहां तक पहुंचने की सुविधा

मुंबई, पुणे, नागपुर, कोल्हापुर, सांगली और औरंगाबाद जैसे प्रमुख शहरों से यहां तक सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध है। लातूर का रेलवे स्टेशन भी यहां आने वाले यात्रियों के लिए सुविधाजनक है।

मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे से रात 8 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं।

Created On :   15 Feb 2026 7:29 PM IST

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