- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- मुंबई
- /
- चुनावों के दौरान हिंसा मामले में...
बॉम्बे हाई कोर्ट: चुनावों के दौरान हिंसा मामले में दिवंगत पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे को गिरफ्तारी से मिला अंतरिम संरक्षण

- 5 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई
- महाड नगर परिषद चुनावों के दौरान हुई हिंसा का मामला
Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने रायगढ़ जिले में महाड नगर परिषद चुनावों के दौरान हुई हिंसा के मामले में कांग्रेस के दिवंगत पूर्व विधायक माणिकराव जगताप के बेटा और एनसीपी अजित गुट के नेता श्रीयांश जगताप को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला है। राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि 5 जनवरी को अगली सुनवाई की तारीख तक श्रीयांश जगताप के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
न्यायमूर्ति आर. आर. भोंसले की एकल पीठ के समक्ष श्रीयांश जगताप की अग्रिम याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में दावा किया गया है कि 2 दिसंबर को महाड नगर परिषद के लिए मतदान चल रहा था। इस दौरान शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। इसको लेकर महाड शहर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में श्रीयांश जगताप का नाम भी शामिल है। याचिका में जगताप ने अग्रिम जमानत की मांग की।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने निर्देश लेने के लिए समय की मांग की। पीठ ने कहा कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक अंतरिम संरक्षण जारी रहेगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों पक्षों ने क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई हैं। एक एफआईआर में शिवसेना विधायक और महाराष्ट्र कैबिनेट मंत्री भरत गोगवाले के बेटे विकास गोगवाले, उनके चचेरे भाई महेश गोगवाले और उनके समर्थकों के नाम हैं, तो दूसरी ओर एफआईआर में जगताप और उनके समर्थकों के नाम शामिल हैं।
एनसीपी की शिकायत के अनुसार विकास गोगवाले और अन्य कथित तौर पर मोटरसाइकिल पर उनके पास आए और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इसके बाद एक अन्य मतदान केंद्र पर जगताप के समूह के सदस्यों पर हमला किया, गाली-गलौज की और शारीरिक बल का प्रयोग किया। विकास गोगावाले की अोर से आरोप लगाया कि पोलिंग बूथ से घर लौटते समय उन्होंने सड़क किनारे एनसीपी कार्यकर्ताओं को खड़े देखा। उनमें से एक ने कथित तौर पर पिस्तौल निकाली और गोगावाले के चचेरे भाइयों पर गोली चला दी। शिकायतकर्ता महेश गोगावाले ने दावा किया कि वे सिर्फ इसलिए बच गए, क्योंकि बंदूक मिसफायर हो गई।
पिछले हफ्ते हाई कोर्ट ने विकास गोगावाले, महेश गोगावाले और कैबिनेट मंत्री के अन्य रिश्तेदारों द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने कहा कि आवेदक "बहुत प्रभावशाली व्यक्ति’ थे और अपराध "बहुत गंभीर’ था, जो चुनाव प्रक्रिया के दौरान और वोटिंग के दिन हुआ था। विकास गोगावाले के खिलाफ पहले से तीन मामले थे, जिसमें आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत एक मामला शामिल था। जबकि महेश गोगावाले के खिलाफ धारा 302 (हत्या) के तहत एक मामला था। पीठ ने कहा था कि झड़प में महाराष्ट्र में दो सत्ताधारी गठबंधन सहयोगियों के सदस्य शामिल थे। गवाहों को प्रभावित करने और जांच में छेड़छाड़ की संभावना के कारण हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी।
Created On :   30 Dec 2025 10:09 PM IST











