Nagpur News: बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वन्यजीव कॉरिडोर बेहद जरूरी

बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वन्यजीव कॉरिडोर बेहद जरूरी
  • हाईकोर्ट का केंद्र और राज्य को नोटिस
  • प्रथम दृष्ट्या खनन अनुमति का समर्थन नहीं

Nagpur News बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने ब्रह्मपुरी क्षेत्र के ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना की प्रमुख वन्यजीव कॉरिडोर में लौह खनन अनुमति पर गंभीर संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित खनन से लगभग 60 बाघों के आवास और उनकी आवाजाही पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय मित्र एड. गोपाल मिश्रा ने तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में जानवरों की सुरक्षित आवाजाही के लिए टाइगर कॉरिडोर अत्यंत आवश्यक है। प्रस्तुत तर्कों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या खनन अनुमति का समर्थन नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र व राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।

इसलिए अदालत का रूख गंभीर : यदि राज्य के बाद अब केंद्रीय वन्यजीव बोर्ड से भी इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो एक-दो नहीं बल्कि 60 से अधिक बाघों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वत: जनहित याचिका शुरू करने का फैसला लिया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने न्यायालय मित्र एड. गोपाल मिश्रा द्वारा वन्यजीव कॉरिडोर के संबंध में प्रस्तुत तर्कों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है। इसके मद्देनज़र अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एड. कार्तिक शुकुल और राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील वरिष्ठ विधिज्ञ देवेंद्र चौहान ने पैरवी की।

हमेशा से पर्यावरण प्रेमी रहे हैं आदिवासी : इसके अलावा बंडू धोत्रे ने भी एक नई जनहित याचिका दायर कर ब्रह्मपुरी वन विभाग के तहत चंद्रपुर जिले के ‘लोहार डोंगरी’ स्थित 35.94 हेक्टेयर आरक्षित वन में प्रस्तावित लौह खनन अनुमति रद्द करने की मांग की है। याचिकाकर्ता की ओर से एड. असिम सरोदे ने कहा कि खनन की अनुमति से अपरिवर्तनीय नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि यहां के आदिवासी हमेशा से पर्यावरण प्रेमी रहे हैं और क्षेत्र में लौह अयस्क होने की जानकारी के कारण ही इसका नाम ‘लोहार डोंगरी’ पड़ा। साथ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की मांग की गई।

Created On :   24 Feb 2026 2:28 PM IST

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