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Nagpur News: सरकार की सख्ती से एयरपोर्ट की आमदनी पर पड़ेगा असर

Nagpur News प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशहित में सरकारी खर्चों में कटौती की अपील के बाद राज्य सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों और विधायकों के निजी विमानों से हवाई दौरों पर अंकुश लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही हवाई यात्रा की जाए। इसके लिए भी मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। कारोबारियों से भी निजी विमानों के उपयोग में संयम बरतने की अपील की गई है। सरकार के इस फैसले का असर अब नागपुर एयरपोर्ट की आमदनी पर पड़ता दिख रहा है। नागपुर स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निजी विमानों और हेलिकॉप्टरों की लैंडिंग, पार्किंग और अन्य सेवाओं से हर साल करोड़ों रुपए की कमाई होती है। दावा है कि सरकार की अपील की वीवीआईपी और निजी उड़ानों में कमी आएगी। ऐसे में एयरपोर्ट के राजस्व पर सीधा असर पड़ सकता है।
लैंडिंग और पार्किंग से होती है मोटी कमाई
एयरपोर्ट पर विमान के उतरने पर लैंडिंग चार्ज लिया जाता है, जबकि विमान को एयरपोर्ट परिसर में कुछ घंटों या पूरी रात खड़ा रखने के एवज में पार्किंग शुल्क वसूला जाता है। यह शुल्क विमान के वजन और ठहराव की अवधि के आधार पर तय होता है। 10 टन तक छोटे विमान/हेलिकॉप्टर के लिए 15 हजार तक, 10-25 टन लाइट जेट विमानों के लिए 40 हजार तक, जबकि 25-50 टन मिड-साइज जेट 80 हजार और 50 टन से अधिक भारी निजी विमानों से 80 हजार से 2 लाख तक लैंडिंग चार्ज वसूला जाता है। वहीं एक सामान्य 15 से 20 टन निजी जेट की एक दिन की पार्किंग से एयरपोर्ट को 10 हजार से 30 हजार तक की आय होती है। रात में पार्किंग होने पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है।
2025 में 1,943 प्राइवेट मूवमेंट, 163 करोड़ की कमाई : एयरपोर्ट का संचालन करने वाली मिहान इंडिया लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में नागपुर एयरपोर्ट पर 1,611 निजी विमान और 332 हेलिकॉप्टर मूवमेंट दर्ज किए गए। यानी पूरे साल में कुल 1,943 प्राइवेट उड़ानों का संचालन हुआ। इसी अवधि में एयरपोर्ट ने 163.65 करोड़ रुपए की कुल आय अर्जित की। इसमें 33.31 करोड़ रुपए लैंडिंग चार्ज और 77.75 लाख रुपए पार्किंग शुल्क के रूप में प्राप्त हुए। इस आय में निजी विमानों की हिस्सेदारी अहम रही।
नागपुर की रणनीतिक स्थिति से बढ़ता है निजी मूवमेंट : देश के मध्य में स्थित नागपुर मध्य भारत का अहम ट्रांजिट हब है। शहर के आसपास ताडोबा, पेंच, मेलघाट और कान्हा नेशनल पार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। इसके अलावा विदर्भ में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उत्पादन इकाइयां स्थापित हैं। चंद्रपुर, अमरावती और गड़चिरोली जैसे जिलों तक पहुंचने के लिए नागपुर एयरपोर्ट प्रमुख केंद्र के रूप में काम करता है। यही वजह है कि यहां लगातार वीवीआईपी और कॉर्पोरेट मूवमेंट बना रहता है। क्षेत्र के बड़े नेता, मंत्री और कारोबारी निजी विमान और हेलिकॉप्टरों का उपयोग करते हैं। कई विमान घंटों और कई बार पूरी रात एयरपोर्ट पर खड़े रहते हैं। इससे एयरपोर्ट को पार्किंग और लैंडिंग शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व मिलता है।
घट सकता है गैर-एरोनॉटिकल राजस्व : विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की हवाई यात्राओं में कमी आती है तो एयरपोर्ट के गैर-एरोनॉटिकल राजस्व पर असर पड़ना तय है। हालांकि नियमित व्यावसायिक उड़ानों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। हलाकि, निजी और वीआईपी मूवमेंट घटने से एयरपोर्ट की अतिरिक्त कमाई में गिरावट आ सकती है। खासतौर पर बड़े जैसे आयोजनों के दौरान इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।
Created On :   13 May 2026 1:00 PM IST
















