आत्मनिर्भरता का संदेश: युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना होगा, गडकरी ने कहा - दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए

युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनना होगा, गडकरी ने कहा - दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए
  • युवाओं को सोच बदलनी होगी
  • रोजगार देने वाला बनना होगा
  • संघर्षों से सीखने की जरूरत

Nagpur News. दुनिया इस समय संघर्ष, तनाव और अस्थिरता के कठिन दौर से गुजर रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते टकराव और हिंसा के बीच मानवता को यदि किसी विचारधारा की सबसे अधिक आवश्यकता है तो वह भगवान बुद्ध का शांति, करुणा और विकास का मार्ग है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह संदेश देते हुए कहा कि भारत को सामाजिक समरसता और आर्थिक प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ाना है, जिसमें उद्यमिता की निर्णायक भूमिका है। आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा। जब देश का युवा वर्ग नौकरी मांगने की मानसिकता से बाहर निकलकर रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ेगा। वे शहर के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में बुद्धिस्ट एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक बिजनेस कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे।

आत्मनिर्भरता का संदेश

गडकरी ने कहा कि आज देश में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवा और उद्यमी अवसरों को पहचानें और जोखिम उठाने का साहस दिखाएं। व्यापार और उद्योग केवल आर्थिक समृद्धि का माध्यम नहीं हैं। समाज को सशक्त बनाने और नई पीढ़ी के लिए अवसर तैयार करने का सबसे प्रभावी साधन हैं। बौद्ध तथा अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों को अपनी गुणवत्ता, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

युवाओं को सोच बदलनी होगी

गडकरी ने कहा कि लंबे समय तक हमारे समाज में सरकारी नौकरी को ही सफलता का पर्याय माना जाता रहा है। हलाकि, बदलते दौर में यह सोच पर्याप्त नहीं है। युवाओं को इस सोच से बाहर निकलकर उद्योग-व्यवसाय की दुनिया में कदम रखना चाहिए। देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार देने वाले की है। यही सोच भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगी।

संघर्षों से सीखने की जरूरत

अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए गडकरी ने कहा कि सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। हर व्यक्ति और हर उद्यमी को संघर्षों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। चुनौतियों के समय हार मान लेना सबसे बड़ी भूल होती है। कठिनाइयां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और उसे नए समाधान खोजने की प्रेरणा देती हैं। ऐसे में परिस्थितियों का रोना रोने के बजाय मेहनत, नवाचार और आत्मविश्वास को अपनी ताकत बनाएं।

इन उद्योगपतियों का सम्मान

कार्यक्रम में कई उद्योगपति का सम्मान केंद्रीय मंत्री गडकरी के हाथों किया गया। इनमें बी.ई. जयेश रामाडे (सीएमडी, सहयोग ग्रुप), बी.ई. गुणवंत देवपारे (सीएमडी, पिरॅमिड ग्रुप) और बी.ई. सुशील पाटील (सीएमडी, प्रोजेक्ट कन्स्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) शामिल है। इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्यमी, व्यवसायी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

Created On :   18 May 2026 6:51 PM IST

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