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कारोबारी एरिया का संकट कायम: बिजली गुल के बाद लो वोल्टेज का टेंशन, महंगी बिजली का बिल चुकाने वाले उद्योगों पर पावर का संकट

Nagpur News. बिजली गुल के साथ ही कई इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या खड़ी हो गई है। पंखे व कूलर पूरी क्षमता से हवा नहीं दे रहे। महावितरण की ओर से बिजली का बुनियादी ढांचा मजबूत करने का दावा करने के बाद भी बिजली गुल व लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है।
लोग पसीने से तरबतर
शनिवार आधी रात के बाद घोगली, शंकरपुर, वेलाहरी व आसपास के एरिया में 3 बार बिजली आपूर्ति ठप हुई। शक्तिमातानगर व शेषनगर में भी बिजली गुल रही। बिजली आने पर परिसर में लो वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। बालाजीनगर पश्चिम व महात्माफुले नगर में भी हर दिन बिजली की आंख-मिचौली चल रही है। नंदनवन जगनाडे चौक परिसर, नंदनवन झोपडपट्टी परिसर में बिजली गुल के साथ ही लो वोल्टेज बड़ी समस्या बनी हुई है। गांजाखेत चौक परिसर, ज्योतिनगर, खदान, धोंडबा चौक व आसपास के एरिया में रविवार दोपहर 3 बजे से डेढ़ घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रही। दोपहर में बिजली गुल होने से लोग पसीने से तरबतर हो गए।
कारोबारी एरिया का संकट कायम
शहर का हृदयस्थल इतवारी कारोबारी एरिया है। इसके अलावा यहां रिहायशी क्षेत्र भी है। पिछले कुछ दिनों से इतवारी, खापरी पुरा, धारस्कर गली, नाईक गली, इतवारी पोस्ट ऑफिस एरिया, शहीद चौक, टांगा स्टैंड परिसर में हर दिन बिजली गुल हो रही है। रविवार दोपहर को भी परिसर में बिजली आपूर्ति बंद हुई। क्षेत्र के अनुराग तिवारी का कहना है कि बिजली की आंख-मिचौली परिसर के लोगों पर भारी पड़ रही है।
बिजली की रिकार्ड तोड़ खपत
गर्मी में बिजली की खपत बढ़ती है, लेकिन इस बार सारे रिकार्ड टूट गए हैं। पिछले पांच दिन से बिजली की खपत 900 मेगावॉट व उससे ज्यादा बनी हुई है। पिछले साल अधिकतम 800 मेगावॉट तक बिजली खपत थी, लेकिन इस बार 900 मेगावॉट पार होने से महावितरण के पसीने छूट रहे हैं। मई के आखिरी तक बिजली खपत का यह आंकड़ा कायम रहने की संभावना है। नागपुर का तेजी से विस्तार होने से बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।
महंगी बिजली का बिल चुकाने वाले उद्योगों पर पावर का संकट
विदर्भ के औद्योगिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले एमआईडीसी क्षेत्र इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। हिंगना, बुटीबोरी, कलमेश्वर समेत जिले के लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्रों में बार-बार हो रही बिजली कटौती से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि महाराष्ट्र में उद्योग देश की सबसे महंगी बिजली का भुगतान कर रहे हैं, इसके बावजूद निर्बाध आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
आर्थिक नुकसान
गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग में तेजी आई है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्रों में दिन में कई बार बिजली गुल हो रही है। अचानक आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन प्रक्रिया रुक रही है। मशीनें बंद हो रही हैं। श्रमिकों को घंटों तक खाली बैठना पड़ता है। इससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय पर ऑर्डर पूरे करने में परेशानी आ रही है।
अव्यवस्था का खामियाजा
आर. बी. गोयनका, पदाधिकारी, वीआईए के मुताबिक गर्मियों में सिस्टम ओवरलोड हो गया है। इसी के चलते यदि औद्योगिक क्षेत्रों में बार बार बिजली संकट के हालत पैदा हो रहे हैं। इसका असर उद्योगों और उत्पादन पर पड़ रहा है। ऐसे में एमआईडीसी क्षेत्र में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाए तो बिजली तंत्र पर दबाव कम होगा। महावितरण की अव्यवस्था का खामियाजा उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है।
कटौती बेहद चिंताजनक
रमेश अग्रवाल, उद्योगपति के मुताबिक महंगी बिजली के बावजूद औद्योगिक क्षेत्रों में कटौती बेहद चिंताजनक है। बार बार बिजली गुल होने से उत्पादन शेड्यूल बिगड़ जाता है। ऐसा ही चलता रहा तो इसका सीधा असर उद्योगों की वृद्धि और निवेश पर पड़ेगा।
Created On :   18 May 2026 6:39 PM IST












