comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

7 माह की बच्ची ने  निगला लॉकेट, 3 डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेट कर लौटाईं सांसें  

7 माह की बच्ची ने  निगला लॉकेट, 3 डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेट कर लौटाईं सांसें  

डिजिटल डेस्क छतरपुर । कहते है कि जब तक सांस है आस नहीं छोडऩा चाहिए, यह पंक्तियां उस सात माह की बच्ची प्रिया राजा के लिए सार्थक हैं, जिसने गुरुवार को सांस टूट जाने के बाद मौत को हराकर नई जिंदगी पा ली। मामला जिला अस्पताल का है, जहां महोबा उप्र से रैफर होकर सात माह की बच्ची प्रिया कानपुर और झांसी मेडीकल कालेज जाने के बजाय छतरपुर आई। उसने गलती से एक लॉकेट को निगल लिया था, जो श्वसन नली में गले के नीचे तक पहुंचकर फंस गया था। बच्ची की सांस टूटने लगी थी और बार-बार बेहोश भी हो रही थी। श्वसन नली में लॉकेट फंसने से तुरंत बच्ची का ऑपरेशन किया जाना था, मगर मेजर ऑपरेशन होने और जिला अस्पताल छतरपुर में सीमित संसाधन होने से यह ऑपरेशन असंभव प्रतीत हो रहा था। ओटी इंचार्ज नर्स ने अस्पताल के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. शरत चौरसिया को कॉल किया और बच्ची का एक्सरे कराया। डॉ चौरसिया ने अस्पताल पहुंचकर केस समझा और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता चौरसिया को बुलाया। दोनों डॉक्टरों ने मेजर ऑपरेशन की व्यवस्थाएं नहीं होने पर रिस्क लेकर सीमित संसाधनोंं में ही लॉकेट को श्वसन नली से निकालने का निर्णय लिया। तब दोनों डॉक्टरों ने डॉ. विनीत पटैरिया निश्चेतना विभाग का सहयोग लेकर आधे घंटे के प्रयास में गले के अंदर फंसे लॉकेट को निकाला। बिना चीरफाड़ किए तीनों डॉक्टरों ने असंभव प्रतीत हो रहे ऑपरेशन को संभव किया और एक जटिल ऑपरेशन को सीमित संसाधनों में ही सरल बना दिया।
गले में फंसा था सोने का लॉकेट
ऑपरेशन को लीड करने वाले डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि बच्ची की सांसें रुक रहीं थीं और उसका बच पाना नामुमकिन लग रहा था। मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने की स्थिति में पेशेंट के न होने पर हमने ओटी में ही लॉकेट निकालने का निर्णय लिया। सभी साथी डॉक्टर्स की हैल्प से हमने इसे निकाल लिया। अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। बच्ची के माता-पिता ने डॉक्टरों को बच्ची की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। वहीं इस ऑपरेशन में डॉक्टर्स के अलावा ओटी स्टॉफ नर्स निर्मला पटैरिया, रामरती, नागेंद्र रैकवार एवं स्वीपर ममता शामिल रहे। डॉक्टरों के एक सामूहिक प्रयास ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धरती पर भगवान अभी भी किसी न किसी रूप में मौजूद है।
 

कमेंट करें
vnheB
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।