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 क्राप कटिंग सर्वे के अनुसार उड़द को सबसे ज्यादा नुकसान, 100 प्रश. मुआवजा मिलेगा

 क्राप कटिंग सर्वे के अनुसार उड़द को सबसे ज्यादा नुकसान, 100 प्रश. मुआवजा मिलेगा

डिजिटल डेस्क छतरपुर/ बकस्वाहा । कलेक्टर के निर्देश पर मानसून के दौरान अतिवृष्टि से प्रभावित खरीफ फसल की क्रॉप कटिंग एक्सपेरीमेंट रिपोर्ट के लिए दो विभागों के संयुक्त जांच दल ने बकस्वाहा के धरमपुरा गांव में सर्वे किया। कृषि एवं राजस्व विभागों के साथ बीमा कंपनी ने सोयाबीन एवं उड़द की दलहनी फसल पर प्रयोग कर नुकसान के अनुपात का भी आकलन किया। जांच दल के साथ स्थानीय तहसीलदार और पटवारी भी मौजूद रहे। ज्ञात हो कि इस वर्ष मानसून के दौरान जिले की बकस्वाहा तहसील में सबसे अधिक बारिश हुई है, इसमें सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान हुआ है। 
बीमा के बावजूद नहीं मिलता लाभ
किसान राममिलन, महेश यादव ने बताया कि फसल नुकसान के बावजूद बीमा प्रक्रिया के बारे में जानकारी न होने से नुकसान नहीं मिल पाता है। सोसायटी, बैंक में अधिकतर किसानों के केसीसी होने पर अनिवार्य फसल बीमा होता है, मगर नुकसान के लिए किसान क्लेम नहीं करते हैं। जिससे उन्हें नुकसान नहीं मिलता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी भी फसल नुकसान के बाद मेहनत से बचने के लिए क्रॉप कटिंग नहीं करते है और कागजों में मनचाही रिपोर्ट बनाकर दे देते हैं। अधिकतर किसान क्लेम से वंचित हो जाते हैं, अगर किसान चाहें तो न्यायालय में अपील कर सकते हैं। प्रयोग के दौरान आरआई राजेन्द्र अहिरवार, शिवराज, पटवारी अमान गौड़, दीपक खरे, देवेन्द्र यादव और बीमा कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे। 
ऐसे जांचा नुकसान
सोयाबीन और उड़द की फसलों के नुकसान आकलन के लिए अलग-अलग प्रक्रिया के तहत प्रयोग किए जाते हैं। कृषि बीमा के विशेषज्ञ वकील रमन जैन ने बताया कि सोयाबीन का नुकसान हल्कावार और उड़द की फसल का नुकसान जिलावार जांचा जाता है। सोयाबीन के लिए प्रत्येक हल्के में चार कोनों से फसलों को काटकर तौल की जाती है, इसके बाद थ्रेसिंग कर बीज निकाले जाते हैं। वहीं उड़द के लिए जिले के चार कोनों के ब्लॉक को चुनकर पांच मीटर के क्षेत्र में फसल को घास सहित काटकर वजन लिया जाता है, इसके बाद बीज की तौल की जाती है। अगर फसल का 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है तो उसे सौ प्रतिशत का नुकसान माना जाता है। पांच साल में सबसे कम उपज वाले वर्ष को नुकसान मानकर गणना की जाती है, इस तरह से जांच दल अपनी रिपोर्ट तैयार करता है, इस आधार पर किसान को मुआवजा और क्लेम मिलता है। जांच प्रयोग में बकस्वाहा में सोयाबीन का औसन नुकसान चालीस प्रतिशत और उड़द का नुकसान 50 प्रतिशत से अधिक पाया गया है। इसके अनुसार ही किसानों को मुआवजा मिलेगा, वहीं जिन किसानों के केसीसी हैं, उन्हें बीमा कंपनी द्वारा क्लेम मिल सकेगा।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।