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आर्थिक तंगी के कारण पत्नि और दो बच्चियों को फाँसी पर लटकाकर मार डाला - रस्सी टूटने से बच गया मुखिया 

आर्थिक तंगी के कारण पत्नि और दो बच्चियों को फाँसी पर लटकाकर मार डाला - रस्सी टूटने से बच गया मुखिया 

डिजिटल डेस्क  सागर। संभागीय मुख्यालय सागर के भोपाल-झाँसी बाईपास मार्ग पर स्थित बम्हौरी रेंगुवा में आर्थिक तंगी के कारण परिवार के मुखिया ने अपनी पत्नि व दो बच्चियों को फाँसी पर लटकाकर मार डाला तथा स्वयं भी फाँसी के फँदे पर झूल गया। लेकिन रस्सी  टूटने के कारण परिवार का मुखिया जमीन पर गिर पड़ा और बच गया। आशंका है कि मुखिया ने पत्नि और बच्चियों को फाँसी पर लटकाने से पहले जहर खिलाया और खुद भी जहर खाया।  इस हृदय विदारक घटना के गाँव में सनसनी फैल गई।
 सागर से 3 किलोमीटर दूर मोतीनगर थानांतर्गत ग्राम बम्हौरी रेंगुवा निवासी मनोज पटैल ने आर्थिक तंगी के कारण गुरूवार की सुबह अपने घर में पहले दोनों बच्चियों सोनम और जिया को फाँसी पर लटकाकर मार डाला तथा पत्नि पूनम और स्वयं मनोज पटैल फाँसी पर लटके किन्तु मनोज की फाँसी की रस्सी टूट गई और वह जमीन पर गिर पड़ा। इस हादसे में पत्नि पूनम की भी मृत्यु हो गई। मनोज पटेल को  गंभीर हालत में मेडीकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहाँ मनोज की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। हादसे की सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक आर डी भारद्वाज, टीआई संगीता सिंह और एफएसएल टीम मौके पर पहुँची। 
दो बच्चियाँ बच गई 
मनोज पटैल की चार बेटियाँ थी जिनमें दो बेटी जुड़वा थी। दोनों जुड़वा बेटियाँ अलग मकान में अपने दादा-दादी तथा ताऊ के पास थी। इसलिए दोनों इस हादसे के शिकार होने से बच गई। पुलिस के अनुसार मनोज पटैल और बड़े भाई महेश पटैल गाँव में ही 7 एकड़ भूमि ठेके पर लेकर खेती भी कर रहे है। सभी का एक ही जगह खाना बनता है। मनोज पटैल पत्नि और दो बच्चियाँ अलग मकान में आकर सोते थे। जानकारी के अनुसार मनोज पटैल और महेश पटैल खेती के अलावा मकानों पर पुट्टी का कार्य करते थे। हालांकि मनोज सट्टा खेलता था और शराब पीने का आदी था। पता चला है कि मनोज पटैल के पास बीपीएल कार्ड नहीं था। हालांकि संबल कार्ड (नया सबेरा) होने की जानकारी मिली है।
 इनका कहना है 
 यह सुसाईड का मामला है। मनोज की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं  थी। घटना के कारणों की जांच कराई जा रही है। मृतकों के गले पर फांसी के निशान पाए गए है। पीएम और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल के बाद स्पष्ट होगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना में ले लिया है।
-अमित सांघी, पुलिस अधीक्षक, सागर

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।