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दहेज हत्या में पति, सास, ससुर, देवर और मामा ससुर को 8-8 साल की सजा 

दहेज हत्या में पति, सास, ससुर, देवर और मामा ससुर को 8-8 साल की सजा 

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। जिला अदालत ने दहेज हत्या के आरोप में  श्रद्द्धा कॉलोनी साकेत नगर निवासी पति चंद्रेश तिवारी, ससुर चंद्रेशेखर तिवारी, सास सुनीता तिवारी, देवर अंश तिवारी और मामा ससुर मनोरंजन मिश्रा को 8-8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार पाठक ने पांचों आरोपियों पर 6-6 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे

अभियोजन के अनुसार गुप्तेश्वर निवासी रेणु तिवारी का विवाह 12 मई 2013 को श्रद्द्धा कॉलोनी साकेत नगर निवासी चंद्रेश तिवारी के साथ हुआ था। शादी के पहले दहेज में कार की मांग की गई थी, लेकिन रेणु का परिवार कार नहीं दे पाया। इसकी वजह से चंद्रेश का पूरा परिवार नाराज था। शादी के तीन-चार दिन बाद चंद्रेश और उसके परिवार वालों ने फिर से कार की मांग की। रेणु के भाई पंकज मिश्रा ने चंद्रेश को डेढ़ लाख रुपए दिए। इसके बाद भी रुपयों की मांग की जाती रही। पंकज मिश्रा ने कुछ दिन बाद फिर से 25 हजार रुपए नकद दिए गए। इसके बाद भी पति चंद्रेश तिवारी, ससुर चंद्रेशखर तिवारी, सास सुनीता तिवारी, देवर अंश तिवारी और मामा ससुर मनोरंजन मिश्रा लगातार रेणु को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। 

फांसी पर लटाक पाया गया था शव

एक जुलाई 2014 को रेणु तिवारी का शव फांसी पर लटकता हुआ पाया गया। परिवार के सभी सदस्य फरार हो गए। रेणु का अंतिम संस्कार उसके मायके वालों ने किया। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में धारा 302, 304 बी, 498 ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। लोक अभियोजक अशोक पटेल और फरियादी के अधिवक्ता जितेन्द्र पांडेय ने तर्क दिया कि आरोपियों ने पहले रेणु तिवारी की हत्या की। इसके बाद हत्या को आत्महत्या बताने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया और फरार हो गए। ऐसे मामले में आरोपियों को कठोर सजा दी जाना चाहिए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपियों को धारा 302 में दोषमुक्त कर दिया। दहेज हत्या की धारा 304 बी में पांचों आरोपियों को 8-8 साल की सजा और 6-6 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।