comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कृषि अधोसंरचना योजना में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा

December 23rd, 2020 16:24 IST
कृषि अधोसंरचना योजना में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा

डिजिटल डेस्क, सीहोर। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को "एजुकेट" किया जाए, कि वर्तमान रबी तथा खरीफ में कौन सी फसल तथा कितनी मात्रा में लगाई जाए जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन मिल सके तथा बेहतर मूल्य प्राप्त हो। इसके लिए प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र में रबी व खरीफ फसलों की बुआई के पहले इन फसलों की सूची प्रदर्शित की जाए। इस संबंध में प्रदेश के दोनों कृषि विश्वविद्यालय भी सक्रिय भूमिका निभाएं- मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि से संबंधित विभिन्न योजनाएँ सैद्धांतिक न होकर व्यवहारिक हो, जिनका लाभ किसानों को मिल सके। ऐसी योजनाएँ बनाने का क्या लाभ जो किसानों के खेतों तक पहुँच ही न पाएं। अनुपयोगी योजनाओं को बंद किया जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री के.के. सिंह, प्रमुख सचिव श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव श्री मनोज गोविल आदि उपस्थित थे। निरंतर करें फसलों की निगरानी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कृषि विभाग फसलों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करे, जिससे एकदम बीमारी लगकर फसलें समाप्त न हो जाएं, जैसा इस बार सोयाबीन में हुआ। प्रमाणित बीजों के पैकेट्स पर हॉलोग्राम अनिवार्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता का बीज सुनिश्चित कराने के लिए प्रमाणित बीजों के पैकेट्स पर हॉलोग्राम अनिवार्य रहेगा। अगले खरीफ से यह प्रावधान लागू होगा। गांवों के लिए समग्र कृषि विकास कार्यक्रम बनाएं मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि कृषि क्षेत्र में आमदनी बढ़ाने के लिए गांवों के लिऐ समग्र कृषि विकास कार्यक्रम बनाए जाएं। शोध का लाभ खेत तक मिलना चाहिए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि "लैब टू लैंड" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विश्वविद्यालयों ने शोध कर योजना तैयार कर ली है। यह केवल शोध तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। शोध का लाभ किसान के खेत तक पहुंचना चाहिए। प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडियों को हाइटैक बनाया जाएगा मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडियों को आधुनिक हाइटैक बनाया जा रहा है। इनमें गोदाम, भंडारण, मूल्य संवर्धन, शीत भंडारण और एग्री क्लीनिक आदि सुविधाएं होंगी। ग्रेडिंग मशीनें भी लगाई जाएंगी। मिशन मोड पर करें एफ.पी.ओ. का कार्य मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम दिलाने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक एफ.पी.ओ. (किसान उत्पादक समूह) बनाए जाएं तथा वर्तमान एफ.पी.ओ. को अधिक सक्रिय किया जाए। इससे किसान अपनी फसल सीधे बाजार में बेच पाएगा तथा बिचौलिए कम होंगे। वर्तमान में प्रदेश में 394 एफ.पी.ओ. सक्रिय है। एफ.पी.ओ. में न्यूनतम 03 व्यक्ति हो सकते हैं। हर वर्ष 30 प्रतिशत बीज का प्रतिस्थापन होना चाहिए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अच्छी फसलों के लिए प्रतिवर्ष 30 प्रतिशत बीज का प्रतिस्थापन होना चाहिए। किसानों को उन्नत बीज मिलना चाहिए। प्रदेश में बीज उत्पादक सहकारी समितियों को और सक्रिय किया जाए। 2 जिलों में नए कृषि विज्ञान केन्द्र वर्तमान में प्रदेश के 50 जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित हैं। शेष 02 जिलों विदिशा एवं निवाड़ी में नए कृषि विज्ञान केन्द्र खोले जाएंगे। प्रदेश की प्रमुख फसलों की जी.आई. टैगिंग मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की प्रमुख फसलों शरबती गेहूँ, लाल ग्राम पिपरिया तूअर, काली मूंछ चावल, जीरा शंकर चावल तथा चिन्नौर धान की जी.आई. टैगिंग कराई जाए। बासमती चावल की जी.आई. टैगिंग कराई जा रही है। केन्द्र सरकार की कृषि अधोसंरचना (AIF) योजना में मध्यप्रदेश अव्वल कृषि अधोसंरचना विकास के लिए ऋण प्रदाय किए जाने की केन्द्र सरकार की कृषि अधोसंरचना (AIF) योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश भारत में प्रथम स्थान पर है। मध्यप्रदेश से 231 करोड़ रूपए के कुल 222 प्रकरण सत्यापित किए गए हैं। इनमें से 23 प्रकरणों में 21 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है तथा 98 करोड़ के 87 प्रकरण बैंकों के पास ऋण वितरण के लिए लंबित हैं। शेष में कार्यवाही जारी है। इसके अंतर्गत सर्वाधिक प्रकरण वेयर हाउस के लिए 152 करोड़ के तथा इसके बाद कोल्ड स्टोरेज के लिए 26 करोड़ के, सौटिंग एवं ग्रेडिंग के लिए 2.2 करोड़ के तथा लॉजिस्टिक के लिए 2.02 करोड़ रूपए के प्रकरण प्रस्तुत किए गए हैं।

कमेंट करें
bvaXp
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।