दुग्ध उत्पादकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही नई तकनीक: एजोला घास से दुधारू पशुओं में बढ़ रही दूध देने की क्षमता

August 30th, 2021

डिजिटल डेस्क रीवा । कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से एक नवीन तकनीक को विकसित किया गया है। यह तकनीक दुग्ध उत्पादकों के लिए वरदान सिद्ध होने जा रही है। बताया गया है कि केन्द्र की ओर से किए गए रिसर्च के बाद एजोला घास को दुग्ध उत्पादकों के लिए उपयोगी पाया गया है। इसका प्रयोग दुधारू गाय पर किया गया है, जिसके परिणाम आश्चर्यजनक पाए गए हैं। बताया गया है कि एजोला घास के सेवन से दुघारू पशुओं में दुग्ध देने की क्षमता का विकास होता है। इस तरह दुग्ध उत्पादन में लगे पशुपालकों की आय में वृद्धि होती है और कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त करने में सफल रहते हैं। इन दिनों इस घास को उगाने के लिए केन्द्र में इंतजाम किए गए हैं। जिन्हे क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों को वितरित किया जा रहा है। जिसके परिणाम भी बेहतर आ रहे हैं। 
प्रोटीन की बहुलता
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि एजोला घास में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। जिसका सेवन दुधारू पशुओं को कराने पर उनकी दुग्ध देने की क्षमता में वृद्धि होती है।  वह सामान्य की तुलना में इस घास का सेवन करने पर अधिक दुग्ध दे पाते हैं। 
उगाना आसान
वैज्ञानिकों के अनुसार इस घास का उत्पादन करने में आसानी होती है। इसे तैयार करने के लिए टैंक के पानी में गोबर घोल दिया जाता है। इसके बाद घोल में एजोला चारा डाल दिया जाता है। इस तरह ये आसानी से उग आता है और इसकी वृद्धि भी तीव्र गति से होती है। 
तेजी से बढ़ रहा क्षेत्र के किसानों का रुझान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एजोला घास को उगाने में होने वाली सरलता और दुग्ध उत्पादन की बढऩे वाली क्षमता को देखते हुए जागरूक किसानों का इस ओर रुझान बढ़ रहा है। केन्द्र की ओर से इसके उगाने के बारे में किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। साथ एजोला घास को भी उन्हे उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसकी वजह से यह तेजी से क्षेत्र के किसानों के पास पहुंच रहा है। यही नहीं दुधारू पशुओं को पालने के लिए भी क्षेत्र के किसानों में आकर्षण बढ़ रहा है। बताया गया है कि पहले जहां केन्द्र में आने वाले गिनती के पशुपालक थे अब बढ़ गए हैं।
 

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