comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

रायगढ़ : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में नहीं चलेगी लापरवाही-कलेक्टर श्री भीम सिंह

November 18th, 2020 16:30 IST
रायगढ़ : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में नहीं चलेगी लापरवाही-कलेक्टर श्री भीम सिंह

डिजिटल डेस्क, रायगढ़। जवाफूल की खेती को बढ़ावा देने गठित 05 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को 15-15 लाख रुपये की मिलेगी राशि कलेक्टर श्री भीम सिंह ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक ली। उन्होंने पिछले बैठक में कुछ किसानों के चालान की राशि गलत हेड में जाने के कारण राशि बीमा कंपनी को नहीं मिल पायी है अत: उसे सही हेड में ट्रंासफर करवाने के लिये लीड बैंक मैनेजर को निर्देशित किया था। उक्त कार्य पूर्ण नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुये संबंधित बैंक अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही के लिये निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है इसके क्रियान्यवन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। बैठक में सारंगढ़ क्षेत्र के कुछ पात्र किसानों के क्लेम सेटल नहीं हो पाने पर उन्होंने लीड बैंक मैनेजर को निर्देशित किया कि संबंधित बैंकों से समन्वय कर किसानों का दावा भुगतान करवाये। उन्होंने बैठक में दावा भुगतान के सत्यापन के भी निर्देश दिये। साथ ही किसानों से प्राप्त शिकायतों का समुचित निराकरण करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जवाफूल की खेती को बढ़ावा देने के लिये गठित 5 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को आर्थिक सहयोग के रूप में डीएमएफ मद से प्रति एफपीओ 15 लाख रुपये की राशि प्रदान की जायेगी। जिसका उपयोग जवाफूल की खेती के साथ ही उसकी मार्केटिंग में उपयोग की जायेगी। यह राशि बिना ब्याज के ऋण के रूप में एफपीओ को उपलब्ध करवायी जायेगी। बैठक में उन्होंने गोधन न्याय योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से कहा कि गौठानों में खाद निर्माण करवाना कृषि विभाग का कार्य है अत: इसकी अच्छे से मॉनिटरिंग करें तथा गौठानों में वर्मी पिट तथा अन्य निर्माण कार्यों का फीडबैक भी दें। जहां वर्मी टांको तथा वर्मी बेड की आवश्यकता है उसकी जानकारी प्रदान करें। उन्होंने प्रत्येक गौठान से किस दिनांक तक का खरीदा गोबर वर्मी पिट में डाल दिया गया है इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश उप संचालक कृषि को दिये। इस दौरान उप संचालक कृषि श्री एल.एम.भगत सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

कमेंट करें
oZBFV
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।