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संजय टाईगर रिजर्व - नहीं है विदेशी पर्यटकों  का रूझान - देशी पर्यटकों की संख्या भी सीमित

संजय टाईगर रिजर्व - नहीं है विदेशी पर्यटकों  का रूझान - देशी पर्यटकों की संख्या भी सीमित

डिजिटल डेस्क सीधी। संजय टाईगर रिजर्व में बीते पांच वर्ष के दौरान जहां केवल 11 विदेशी पर्यटक आये हैं वहीं देशी पर्यटकों की संख्या 2310 रही है। शुरूआती दौर में देशी पर्र्यटक भी कम संख्या में आते रहे हैं  बाद में पर्यटकों की तादात बढ़ी तो वर्ष 2018-19 में पर्यटकों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच गई। 
जिले में संजय टाईगर रिजर्व पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये कई खूबियों को समेटे हुये है पर  अव्यवस्था के चलते उतनी संख्या में पर्यटक आमद नहीं दे रहे जितनी कि दूसरे राष्ट्रीय उद्यानों में पहुंच रहे हैें। विभागीय अमला पर्याप्त बजट न होने का रोना रोता है तो दूसरी तरफ जितनी भी राशि विभाग को प्राप्त हो रही है उसका सही तरह से उपयोग नही हो रहा है। इतना जरूर है कि टाईगर रिजर्व बनने के बाद बाघों की संख्या बढ़ाने को लेकर किया गया प्रयास काफी हद तक उत्साहित करने वाला रहा है। वर्ष 2005 की गणना में यहां बाघों की संख्या शून्य के करीब मानी गई थी। यद्यपि गणना के दौरान कुछ बाघों की मौजूदगी जरूर बताई गई थी किंतु वन्य प्राणी संस्थान देहरादून में बाघों की मौजूदगी को नकार दिया था। बाद में किये गये प्रयास का नतीजा रहा है कि वर्तमान में बाघों की संख्या दर्जन पार हो गई है।  संजय टाईगर रिजर्व में बाघों की मौजूदगी के कारण ही देशी विदेशी पर्यटक आने लगे हैें। पर्यटकों के लिहाज से उतनी सुविधायें तो विकसित नही हेा पाई हैें पर इसके बाद भी जंगल में बाघ देखने पर्यटक पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2014-15 में यहां 131 पर्यटक आये थे जबकि 2015-16 में 256 और 2016-17 में 521 तथा 2017-18 में पर्यटकों की संख्या घटी तो 423 पर पहुंच गई। वर्ष 2018-19 में भारतीय पर्यटकों की संख्या जरूर उत्साहजनक रही है इस वर्ष 979 पर्यटक संजय टाईगर रिजर्व भ्रमण करने आये थे। बता दें कि पिछले पांच वर्ष के दौरान केवल वर्ष 2018-19 में विदेशी पर्यटक यहां आये थे। विदेशी पर्यटकों की कुल संख्या 11 बताई गई है। 
प्रचार-प्रसार का अभाव 
संजय टाईगर रिजर्व में धीरे-धीरे बाघों की संख्या दर्जन पार होने लगी है किंतु यहां मौजूद बाघों के अलावा दूसरे जंगली जानवरों को प्रचारित नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे विभाग शिकारियों के सक्रिय हो जाने का तर्क देता है तो दूसरी तरफ प्रचार-प्रसार न होने पर पर्यटकों की आमद बढ़ाने में समस्या हो रही है। जाहिर है समीप के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में जहां देशी-विदेशी पर्यटकों की भरमार रहती है वहीं बांधवगढ़ आने वाले पर्र्यटकों को संजय टाईगर रिजर्व की जानकारी न होने के कारण पर्यटक यहां तक नहीं आते हैं। जबकि यहां वाराणसी, इलाहाबाद, बांधवगढ़ नेशनल पार्क, अमरकंटक आने वाले पर्यटकों को थोड़े से ही प्रयास में लाया जा सकता है। यहां संजय नेशनल पार्क में बाघों को नजदीक से देखने के अलावा बगदरा अभ्यारण्य के कृष्ण मृगों को भी दिखाया जा सकता है। साथ ही घडिय़ाल अभ्यारण्य, चंदरेह मंदिर को भी पर्यटन की कड़ी में जोड़ा जा सकता है। 
 

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