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सोयायाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह

August 28th, 2020 15:47 IST
सोयायाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह

डिजिटल डेस्क, खण्डवा। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए कृषि कार्य के दौरान कृषि कार्य करते समय 4 से अधिक व्यक्तियों को इकट्ठा ना होने दें तथा उनके बीज 2 मीटर की पर्याप्त दूरी रखें। बुखार, सर्दी खांसी होने की स्थिति में अपने खेतों पर काम कर रहे श्रमिकों, व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्ष की सलाह दें। कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतु अपने चेहरे पर मास्क, गमछा, रुमाल, कपडा लगाएं तथा हाथों मंे मौजे व ग्लब्स लगाना अनिवार्य करें। कृषि कार्य करते समय मादक पदार्थ व तम्बाकू का सेवन ना करें। समय-समय पर 20 सेंकड तक अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोंये। सोयाबीन कृषकों के लिए साप्ताहिक सलाह उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने कृषको को सलाह दी है कि अधिक वर्षा के कारण जल भराव की स्थिति से होने वाले नुकसान को कम करने हेतु शीघ्रातिशीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करें। अधिक वर्षा के कारण सोयाबीन की फसल मं फफूंदजनित एन्थ्रेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट तथा राइजोक्टोनिया रूट रॉट नामक बीमारी का प्रकोप होने की सूचना प्राप्त हुई है। अतः इनके नियंत्रण हेतु सलाह है कि टेबूकोनाझोल 625 मिली. प्रति हे. अथवा टेबूकोनाझोल व सल्फर 1 किग्रा. प्रति है अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्ल्यु.जी. 500 ग्रा. प्रति हे. अथवा हेक्जाकोनाझोल 5 प्रतिशत् ई.सी. 800 मिली. प्रति हे. से छिडकाव करें। कई क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर पीला मोजाइक वायरस बीमारी का प्रक्रोप देखा गया है। अतः इसके नियंत्रण हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही अपने खेत में जगह-जगह पर पीला चिपचिपा टेªप लगाएं जिससे इसका संक्रमण फैलाने वानी सफेद मक्खी का नियंत्रण होने में सहायता मिलें। इसके रोकथाम हेतु यह भी सलाह है कि फसल पर पीला मोजाइक रोग के लक्षण दिखते ही ग्रसित पौधों को अपने खेत से निष्कासित करें। ऐसे खेत में सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु अनुशंसित पूर्व मिश्रित सम्पर्क रसायन जैसे बीटासायफ्लुथ्रिन व इमिडाक्लोप्रीड 350 मिली. प्रति हे. या पूर्व मिश्रित थायोमिथाक्सम व लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली. प्रति हे. का छिडकाव करें जिससे मक्खी के साथ-साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी एक साथ नियंत्रण हो सके। उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने बताया कि प्रायः यह देखने में आया है कि कुछ क्षेत्रों में लगातार हो रही रिमझिम वर्षा की स्थिति में पत्ती खाने वाली इल्लियों द्वारा पत्तियों के सांथ-सांथ फलियों को भी नुकसान पहुंचा रही है जिससे अफलन जैसी समस्या होने की संभावना है। अतः कृषकों को सलाह है कि पत्तियाँ खाने वाली इल्लियों के नियंत्रण हेतु सम्पर्क कीटनाशक जैसे इन्डोक्साकार्ब 333 मिली. प्रति हे. या लैम्बडा सायहेलोर्थिन 4.9 सी.एस. 300 मिली. प्रति हे. का छिडकाव करें। कीटनाशक को प्रभावी ढंग से इल्लियों तक पहुंचाने के लिये नैपसेक स्प्रेयर से 500 लीटर या पॉवर स्प्रेयर से 120 लीटर पानी प्रति हेक्टर का उपयोग अवश्य करें। श्री गुप्ता ने बताया कि यदि पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ-साथ सफेद मक्खी का प्रकोप हो, कृषकों को सलाह है कि नियंत्रण हेतु बीटासायफ्लुथ्रिन इमिडाक्लोप्रीड 350 मिली. प्रति हे. या थायोमिथाक्सम व लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली. प्रति हे. का छिडकाव करें। सोयाबीन की फसल में नुकसान करने वाले अन्य कीटों के प्रबंधन हेतु अनुशंसित कीटनाशकों की सूची परिशिष्ट-1 में दी गई है। कृषकों को सलाह है कि अपने खेत में फसल निरीक्षण के उपरांत पाए गए कीट विशेष के नियंत्रण हेतु अनुशंसित कीटशक की मात्रा को 500 लीटर प्रति हे. की दर से पानी के सांथ फसल पर छिडकाव करें। छिड़काव हेतु पावर स्प्रेयर का उपयोग किये जाने पर 120 लीटर प्रति हे. पानी की आवश्यकता होगी एवं छिडकाव भी प्रभावकारी होगा।

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