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 नसबंदी के बाद अस्पताल के फर्श में पड़ी रहीं महिलायें- विभाग की बड़ी लापरवाही

 नसबंदी के बाद अस्पताल के फर्श में पड़ी रहीं महिलायें- विभाग की बड़ी लापरवाही

डिजिटल डेस्क सीधी। जिले में 10 हजार महिलाओं के नसबंदी कराने के मिले लक्ष्य को पूरा करने स्वास्थ्य विभाग ने थोक के भाव नसबंदी तो शुरू कर दिया है किंतु नसबंदी कराने वाली महिलाओं को बिस्तर तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। आपरेशन के बाद संक्रमण की समस्या भी हो सकती है इस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी व्यवस्था न होने के कारण फर्श में महिलाओं को लिटाने की बात कर रहे हैं। 
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग को 10 हजार महिलाओ के नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है जिसके विपरीत अभी तक में केवल 15 फीसदी महिलाओं के नसबंदी किये जा सके हैें। लक्ष्यपूर्ति में कमजोरी केा दूर करने विभाग ताबड़तोड़ नसबंदी के कार्यक्रम तो आयोजित कर रहा है किंतु नसबंदी कराने आने वाली महिलाओं को बिस्तर तक नहीं दे पा रहा है। बताया जाता है कि शुक्रवार को आयुर्वेद औषधालय में कड़कड़ाती ठंड के दौरान थोक के भाव महिला नसबंदी कराये गये और बाद में मरीजों को बरामदे के फर्श में डाल दिया गया था। यहां का नजारा कुछ ऐसा रहा कि जैसे महिलायें नहीं भेड़ बकरियोंं को समूह में रखा गया हो। इस दौरान महिलाओं के साथ में आये परिजनों ने आपत्ति तो की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो सकी है। सीएमएचओ तो गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुये कहते हेंै कि इतनी संख्या में आपरेशन कराने वाली महिलाओं को बिस्तर कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है। इसीलिये उन्हें बेड नहीं दिया जा सका है। फर्श में गद्दे डालकर महिलाओं को लिटाया गया है। फिलहाल नसबंदी के मिले लक्ष्य को पूरा करने स्वास्थ्य विभाग द्वारा मैदानी अमले पर दवाब बनाकर भारी संख्या में महिलाओं को आपरेशन के लिये लाया तो जाता है किंतु उनकी सुविधाओं ओैर संक्रमण पर ध्यान नहीं दिया जाता है। 
बदहाल है स्वास्थ्य व्यवस्था
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जिला चिकित्सालय में जहां चिकित्सकों की मनमानी देखी जा रही है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तो भगवान भरोसे ही व्यवस्था चल रही है। सरकार द्वारा भले ही मरीजों के उपचार के लिये भारी भरकम राशि व्यय की जा रही हो पर जिम्मेवार चिकित्सक मरीजों के उपचार से दूर भाग रहे हैं। अधिकांश समय क्लीनिक में व्यस्त रहने वाले चिकित्सक जिला चिकित्सालय अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कम समय देते देखे जाते हैं। बदहाल चिकित्सा व्यवस्था के कारण ही उपचार के  लिये जिले के लोगों केा रीवा, जबलपुर अथवा नागपुर जाना पड़ रहा है। 
इनका कहना है-
महिला नसबंदी के लिये दस हजार का लक्ष्य दिया गया है। जहां अभी तक में केवल 15 प्रतिशत नसबंदी किये जा सके हैं। हर मरीज को बेड की सुविधा न होने के कारण ही उन्हें फर्श में गद्दे डालकर लिटाया गया है और उपचार किया जा रहा है। 
डा. आरएल वर्मा
सीएमएचओ, सीधी। 
 

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