दीपावली: विठ्ठल-रुक्मिणी माता का पारंपरिक आभूषणों से मनमोहक श्रृंगार, आकर्षक विद्युत रोशनी से जगमग

विठ्ठल-रुक्मिणी माता का पारंपरिक आभूषणों से मनमोहक श्रृंगार, आकर्षक विद्युत रोशनी से जगमग
  • दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंच रहे बड़ी संख्या में श्रद्धालु
  • सोने के मुकुट, मोतियों की माला और बहुमूल्य आभूषणों से सजे आराध्य देव
  • मंदिर परिसर से लेकर भक्तनिवास तक आकर्षक रोशनी

डिजिटल डेस्क, पंढरपुर। महाराष्ट्र के आराध्य देवता श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी दीपावली महोत्सव धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। वसुबारस (गोवत्स द्वादशी) से शुरू हुए दीपावली महोत्सव के अवसर पर श्री विठ्ठल, श्री रुक्मिणी माता और मंदिर के परिवार देवताओं का पारंपरिक एवं बहुमूल्य आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया है। आकर्षक आभूषणों और पारंपरिक पोशाक में सजे आराध्य देवताओं का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह जानकारी मंदिर समिति के प्रबंधक प्रवीणकुमार घम ने दी।

श्री विठ्ठल को सोने का मुकुट और मोतियों का तुरा

दीपावली के अवसर पर श्री विठ्ठल को सोने का मुकुट, माथे का तिलक एवं मणि, कौस्तुभ मणि, बाजूबंद की जोड़ी, हीरे के कंगन, मोतियों का तुरा, मोतियों की कंठी, मछली के आकार के कुंडल, तुलसी की माला, पाजेब-कड़े, मोहरों की माला और जौ के दानों की पारंपरिक 'जवेची' माला धारण कराई गई है।

वहीं, श्री रुक्मिणी माता का श्रृंगार सोने के मुकुट, बाजूबंद, तोड़े, तानवड, लाल चिंचपेटी (गले का हार), जवमनी पदक, लक्ष्मीहार, जौ के दानों की मालाओं, मोहरों की माला, पुतली की माला, हायकोल, सरी और कमरबंद से किया गया है।

परिवार देवताओं का भी विशेष श्रृंगार

मंदिर के परिवार देवताओं को भी दीपावली के अवसर पर पारंपरिक आभूषणों से सजाया गया है। राधिका माता को नक्काशीदार टोप, मोतियों का नेकलेस और पुतली की माला पहनाई गई है। सत्यभामा माता को सिद्धेश्वर टॉप, मोतियों का कंठा, ठुशी और पुतली की माला से सजाया गया है।

इसी तरह श्री व्यंकटेश को झनक-झनक हार, कैरी हार, तुलसी हार, शालिग्राम हार, मोहनमाला और सूर्यकली हार धारण कराए गए हैं। महालक्ष्मी माता का श्रृंगार सोने के कंगन, मोतियों की कंठी, लक्ष्मी पदक लॉकेट, इमिटेशन नेकलेस, पुतली की माला, अष्टपैलू मणकों की कंठी और चांदी के छत्र से किया गया है।

रोशनी से जगमगाया मंदिर परिसर

दीपावली प्रकाश, मांगल्य और आनंद का पर्व है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में विशेष सजावट और रोशनी की गई है। वसुबारस, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन और दीपावली पाड़वा (प्रतिपदा) के अवसर पर श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, तुकाराम भवन, श्री संत ज्ञानेश्वर दर्शन मंडप और भक्तनिवास को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठा है। दीपावली पर आराध्य देवताओं के पारंपरिक श्रृंगार के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंढरपुर पहुंच रहे हैं। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं को सुगम और सुव्यवस्थित दर्शन कराने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

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