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Panna News: पन्ना टाइगर रिजर्व से विस्थापितों को १९ साल बाद भी नही मिलें भू-अधिकार पट्टे, परेशान ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम सौंपी शिकायत, बताई परेशानी

Panna News: पन्ना टाइगर रिजर्व से विस्थापित हुए सैकड़ों ग्रामीण और आदिवासी पुर्नवास भूमि पर पट्टा और कब्जा नहीं मिलने से परेशान है। वर्ष २००६-०७ में ग्राम पीपरटोला और सूरजपुरा को पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा विस्थापित किया गया था और पुर्नवास पैकेज अंतर्गत ग्राम पुखरा में विस्थापित करते हुए पुर्नवास के साथ भूमि आवंटित की गई थी किन्तु दो दशक के बाद भी विस्थापितों को उनकी जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है। ग्रामीण कलेक्ट्रेट और वन विभाग के चक्कर काट रहे है। परेशान ग्रामीणों द्वारा एक बार फिर से कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम पत्र सौंपकर जल्द से जल्द कार्यवाही की मांग की गई है। ग्रामीणों द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व को इस संबंध में पत्र सौंपा गया है। ग्रामीणों ने दिए गए आवेदन में बताया है कि वर्ष २००६-०७ में भू- अर्जन अधिकारी पन्ना द्वारा प्रकरण क्रमांक ०२/अ-८२ के तहत पीपर टोला और सूरजपुरा में जमीनें अधिकृत की गई थी इसका अवार्ड वर्ष २००७ को जारी किया गया था।
विस्थापितों के पुर्नवास के लिए पुखरा में कुल ३७९.५१ हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई थी इस भूमि को जनवरी २०२२ में वन भूमि धारा ३४ के तहत विधिवत अधिसूचित भी किया जा चुका है। विस्थापित शिवदर्शन यादव ने बताया कि प्रशासन लगभग १३ सह खातेदार आदिवासी तथा अन्य लोगों को कागजों पर ०२-०२ हेक्टेयर के पट्टे जारी कर दिए है किन्तु उन्हेें आज तक यह नहीं बताया गया कि उनकी आवंटित जमीन वास्तविक रूप में कहां स्थित है। अरविन्द सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग को विस्थापितों की भू-राजस्व पुस्तक जारी करनी थी इसके लिए एक दल का भी का गठन किया गया था। राजस्व अधिकारियों के अनुसार कुल आवंटित भूमि में से ५० हेक्टेयर भूमि का वन विभाग द्वारा री-नोटिफिक्शन कर दिया है। अधिकारी इस तकनीकी जटिलता के कारण वहां पट्टा देने और भूमि का सीमांकन करने से बच रहे है ग्रामीणों ने मांग की है वन विभाग व राजस्व विभाग तुरंत संयुक्त रूप से भूमि का समस्या का निराकरण करें। मौके पर मुनारे चिन्हित किए जायें जिससे समस्त ग्रामवसियों को जमीन का वास्तविक मालिकाना हक व पट्टे मिल सकें।
Created On :   4 Jun 2026 3:54 PM IST














