Pune City News: आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में देरी से अभिभावक परेशान

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में देरी से अभिभावक परेशान
  • आरटीई प्रवेश में देरी से बच्चों के भविष्य पर संकट
  • स्कूलों की उदासीनता बनी बड़ी बाधा

भास्कर न्यूज, पुणे। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। निजी स्कूलों की पंजीकरण प्रक्रिया पहले ही चरण में अटक जाने से हजारों अभिभावक असमंजस में हैं। स्कूलों की ओर से हो रही देरी के कारण आरटीई के तहत प्रवेश का मुद्दा गंभीर बनता जा रहा है।

शिक्षा विभाग की ओर से तकनीकी समस्याएं और निजी स्कूलों का कम प्रतिसाद देरी के कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, लगातार तीसरे वर्ष आरटीई स्कूल पंजीकरण प्रक्रिया लंबित रहने से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि अंतिम स्कूल सूची कब जारी होगी और उसके बाद वास्तविक प्रवेश प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिला है।

आरटीई अधिनियम के अनुसार, निजी बिना अनुदान प्राप्त स्कूलों को अपनी 25 प्रतिशत सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। बावजूद इसके, कई निजी स्कूल इस नियम की अनदेखी करते हुए आरटीई प्रवेश प्रक्रिया से दूरी बनाए हुए हैं। इस वर्ष भी तीन बार समय-सीमा बढ़ाने के बाद कई स्कूलों ने पंजीकरण पूरा नहीं किया है। इसे प्रशासन की विफलता माना जाए या स्कूलों की जानबूझकर की गई देरी, इस पर अभिभावकों में नाराजगी है।

इस बीच पुणे दौरे पर आए राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने निजी स्कूलों की आरटीई के प्रति उदासीनता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल आरटीई प्रवेशों को लेकर अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि निजी स्कूलों के लिए एक अलग नियमावली तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। साथ ही, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, ताकि भविष्य में अभिभावकों को निजी स्कूलों पर निर्भर न रहना पड़े।

आरटीई का 2200 करोड़ रुपये का अनुदान लंबित

मंत्री भुसे ने यह भी स्वीकार किया कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति के लिए लगभग 2200 करोड़ रुपये का अनुदान लंबित है। इस राशि को चरणबद्ध तरीके से शून्य करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, निजी स्कूलों का आरोप है कि समय पर अनुदान न मिलने के कारण वे आरटीई प्रवेश से बचते हैं।

पंजीकरण न करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई?

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा निजी स्कूलों की उदासीनता मानी जा रही है। कई नामी स्कूल आरटीई पंजीकरण प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं ले रहे हैं। कानून के तहत यह अनिवार्य होने के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से स्कूलों का मनोबल बढ़ा है। अभिभावक संगठनों का आरोप है कि स्कूल मुदत लो और समय टालो की नीति अपना रहे हैं।

इस संबंध में जिला परिषद की उपशिक्षण अधिकारी आस्मा मोमिन ने बताया कि आरटीई स्कूल पंजीकरण प्रक्रिया अंतिम चरण में है। गट शिक्षा अधिकारियों से जानकारी मंगाई गई है और जिन स्कूलों ने अब तक पंजीकरण नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र जारी किए जा रहे हैं। साथ ही, अपंजीकृत स्कूलों की जांच की जा रही है, जिनमें नई और अल्पसंख्यक स्कूलों की जानकारी भी शामिल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरटीई के तहत पात्र स्कूलों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।

प्रवेश प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में अभिभावक और सामाजिक संगठनों ने शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।

Created On :   4 Feb 2026 5:35 PM IST

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