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Pune City News: चुनाव बाद बात तक नहीं करते नेता

- कोथरूड के सुतारदारा क्षेत्र के नागरिकों की पीड़ा
- कहा-पहले आश्वासनों का हिसाब दो, फिर वोट मांगो
भास्कर न्यूज, पुणे। शहर के कोथरूड को शिक्षित, सभ्य और सुख-संपन्न क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। कई बड़े नेता, विधायक, मंत्री और उच्च पदस्थ अधिकारी वहां रहते हैं, इसलिए कोथरूड को विशेष महत्व दिया जाता है। इस चमकदार छवि के पीछे वहां के आम नागरिकों की गंभीर समस्याओं की वर्षों से अनदेखी की गई है। सुतारदारा क्षेत्र के लोगों की पीड़ा यह है कि चुनाव बाद नेता उनके क्षेत्र से गुजर जाते हैं, लेकिन कोई दो मिनट रुककर बात करना भी पसंद नहीं करते।
मनपा चुनाव नौ साल बाद हो रहे हैं, लेकिन इस दौरान दो बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। बावजूद इसके सुतारदारा क्षेत्र की समस्याएं अब भी जस की तस हैं। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि हम वोट मांगने आने वाले नेताओं को पिछले कार्यों का हिसाब देना होगा, तभी उनको वोट मिलेंगे क्योंकि वे हमें केवल आश्वासन दी देते रहते हैं। पहले पिछला हिसाब दो, तभी यहां आओ अन्यथा चुनाव में इसका असर दिखेगा। लोगों का कहना है कि छह साल से उनकी एक ही मांग है, सड़कें और साफ पानी। हालत यह है कि चुनाव से पहले समाधान का आश्वासन मिलता है और बाद में कोई देखने नहीं आता।
सामने से गुजर जाते हैं
कुछ नागरिकों ने यह आरोप भी लगाया कि चुनाव होने के बाद कुछ जनप्रतिनिधि नागरिकों से बात करने को भी तैयार नहीं होते। सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन दो मिनट लोगों के पास रुककर बात नहीं करते। कोथरूड के कई गली, बस्तियां और इलाके लंबे समय से पानी, गटर और सड़क की समस्याओं से जूझ रहे हैं। नागरिकों के अनुसार नेताओं ने आश्वासन तो दिए, लेकिन वास्तविक काम कुछ नहीं हुआ। इसलिए “सुख-संपन्न कोथरूड” की कल्पना केवल कागजों पर ही रह गई है। सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की कमी है। कई क्षेत्रों में नियमित पानी नहीं मिलता। कुछ गलियों में नल से पानी नहीं आता। कुछ गलियों में चैंबर से सीधे गटर का पानी घरों में आता है। हर 10-15 दिन में गटर भर जाता है। इससे स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं और बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोगों से जूझ रहे हैं।
पहाड़ के पानी से घरों में पानी
कोथरूड का कुछ हिस्सा पहाड की ढलान पर है, इसलिए बारिश के समय पहाड़ से आने वाला पानी सीधे घरों में घुसता है। बारिश ज्यादा होने पर घर में रहना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग घर में भोजन कर रहे होते हैं और पानी अंदर आ जाता है। प्रशासन की ओर से कोई ठोस उपाय नहीं होने से कुछ नागरिकों ने अपने खर्च पर घर की ऊंचाई बढ़ाई है। हर किसी के लिए ऐसा करना संभव नहीं है इसलिए कई परिवार अभी भी खतरे में हैं।
खराब सड़कों ने बढ़ाईं मुश्किलें
क्षेत्र की सड़कें भी खराब हैं। कई सड़कें गड्ढों से भरी हैं, जहां बारिश में पानी से भर जाता है। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन और पैदल चलने वालों को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
पानी की टंकी की बदहाल स्थिति
वहां पीने के पानी की टंकी भी खराब स्थिति में है। टंकी के आसपास गंदगी जमी हुई है और सफाई का अभाव है। इससे मिलने वाला पानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया।
दो साल तक घर में पानी घुसता था। लोगों ने सुविधा अनुसार घर की ऊंचाई बढ़ाई। इससे नागरिकों को बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन कोई भरपाई नहीं हुई। कई बार प्रशासन और नेताओं से कहने के बावजूद कोई हल नहीं हुआ।
मनीषा फाटे, स्थानीय नागरिक, कोथरूड
हमारे क्षेत्र में पीने के पानी की स्थिति बहुत खराब है ड्रेनेज और पानी की लाइन एक जैसी हो गई है। टंकी में कभी चप्पल, कभी कचरा गिरा रहता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
ज्योति साबले, स्थानीय नागरिक, कोथरूड
Created On :   9 Jan 2026 2:58 PM IST












