Pune City News: आई.एल.एस. लॉ कॉलेज फीस शिकायत 60 दिनों में निपटाएं राज्य प्राधिकारी

आई.एल.एस. लॉ कॉलेज फीस शिकायत 60 दिनों में निपटाएं राज्य प्राधिकारी
  • फीस वसूली विवाद में छात्र को राहत
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक

भास्कर न्यूज, पुणे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि आई.एल.एस. लॉ कॉलेज के खिलाफ एक छात्र द्वारा दर्ज कराई गई कथित अवैध फीस वसूली की शिकायत पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।

न्यायमूर्ति आर. आई. चागला और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की खंडपीठ ने 12 फरवरी को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह याचिका छात्र एवं अधिवक्ता मयूर सुहास गरुड़ द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2020–21, 2021–22 और 2024–25 के दौरान कथित रूप से अवैध रूप से वसूले गए 1,04,863 रुपये की वापसी के लिए अदालत से निर्देश देने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य प्राधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि 11 अप्रैल 2025 से लंबित शिकायत पर दो माह के भीतर निर्णय ले लिया जाएगा। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि निर्णय जारी होने के एक सप्ताह के भीतर उसकी प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध करा दी जाएगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में कॉलेज प्रबंधन ने अदालत को बताया कि 24 मार्च 2025 को जारी कारण बताओ नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है और आगे भी इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्वीकार कर लिया।

राज्य प्राधिकारियों और कॉलेज की ओर से दिए गए आश्वासनों के मद्देनज़र हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण बिना किसी खर्च के आदेश के साथ कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और सभी पक्षों के अधिकार एवं दलीलें खुली रहेंगी।

सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत के निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश उनकी शिकायत के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कथित अवैध फीस प्रथा को चुनौती देने और छात्रों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से संवैधानिक उपायों का सहारा लिया।

उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं से ठीक पहले यह मुद्दा उठाया था, बाद में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए, प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र प्राप्त किया और अब विधि व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। उन्होंने छात्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें असर्ट करने के लिए इस मामले का विवरण सार्वजनिक किया है।

Created On :   16 Feb 2026 3:12 PM IST

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