Shahdol News: एमपीआईडीसी को 9 माह बाद भी कलेक्टर ने आवंटित नहीं की जमीन

एमपीआईडीसी को 9 माह बाद भी कलेक्टर ने आवंटित नहीं की जमीन
  • नुकसान यह हुआ कि लुधियाना की कंपनी डिफेंस में निवेश के लिए आई तो अनूपपुर में जमीन दिखाना पड़ा
  • शहडोल का कैसे होगा औद्योगिक विकास

डिजिटल डेस्क,शहडोल। शहडोल में औद्योगिक विकास के तमाम दावे जिला प्रशासन की टेबल पर आकर अटक जा रहे हैं। जिले में औद्योगिक विकास पर काम कर रहे मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआईडीसी) की समस्या यह है कि उद्योग स्थापना के लिए आरसीएमएस पोर्टल में 5 जमीनों में आवंटन का आवेदन किया तो एक जमीन में 9 माह, 3 जमीन में 8 माह और एक जमीन के प्रकरण में आवेदन के 4 माह बाद भी कलेक्टर शहडोल द्वारा जमीन आवंटित नहीं की गई।

जमीन आवंटन में हो रही देरी पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह का कहना है कि कुदरी सोहागपुर का आवेदन निरस्त हो चुका है। अन्य जमीनों के आवंटन का प्रस्ताव चाहा गया है।

इन जमीनों के आवंटन का इंतजार

27 मई 2025 को आवेदन कुदरी सोहागपुर 3.403 हेक्टेयर।

9 जून 2025 को जयसिंहनगर के बराछ में 428.680 हे. 10 जून को किरगी बहरा में 56.575 व 12 जून को मलौटी में 107.751 हे. जमीन आवंटन का आवेदन।

>> 6 अक्टूबर को जयसिंहनगर के खड्डा में 299.179 हेक्टेयर आवंटन का आवेदन। इसमें कलेक्टर 3 प्रकरण में आवंटन बता रहे पर एमपीआईडीसी को इसकी जानकारी ही नहीं है।

सोमवार 9 मार्च को लुधियाना स्थित मुनीस ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रमुख लोग शहडोल में डिफेंस सेक्टर के उत्पाद बनाने के लिए जमीन देखने आए तो उन्हें शहडोल के बजाय अनूपपुर जिले में झलसार, बहेराबांध और डोंगरिया की जमीन दिखाई गई।

शहडोल में निवेश को लेकर कंपनी की रुचि ऐसे समझी जा सकती है कि लुधियाना से दिल्ली और वहां से फ्लाइट से जबलपुर फिर कार से शहडोल पहुंचे। रविवार रात रुककर सोमवार सुबह जमीन देखी और दोपहर में जबलपुर से फ्लाइट लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए।

अनूपपुर में निरस्त के बाद पुनर्विलोकन में आवंटन- उद्योग के लिए जमीन आवंटन में अनूपपुर जिला प्रशासन शहडोल से आगे है। वहां भी कुछ जमीनों में फॉरेस्ट का ईशू बताकर निरस्त कर दिया गया था पर बाद में पुनर्विलोकन में आवंटित कर दिया गया।

अनूपपुर में बैहार खोल्हईया जैतहरी में 105.933 हेक्टेयर, डोंगरिया खुर्द कोतमा में 54.500, अगरियानार अनूपपुर में 48.410 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर दी गई। यहां सिर्फ डबनिया पुष्पराजगढ़ में 65.827 हेक्टेयर का आवंटन लंबित है।

मुख्यमंत्री से लेकर उप मुख्यमंत्री तक पूछ चुके फिर भी आवंटन में देरी

> 8 फरवरी को शहडोल के दौरे में आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले धनपुरी में जानकारी ली। वहां बताया गया कि एमपीआईडीसी स्तर से देरी हो रही है। जानकारी भोपाल पहुंची तो एमपीआईडीसी के अधिकारी को फौरन गधिया रवाना किया गया।

गधिया में ग्रीन रुम में जमीन पर चर्चा के दौरान एमपीआईडीसी के अधिकारियों ने कलेक्टर के स्तर पर देरी बताई तो कहा गया कि वन विभाग की जमीन निकल रही है। इस पर सीएम ने कड़े नजरों से कलेक्टर की ओर देखा।

> 10 जनवरी की बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने उद्योग के लिए जमीन आवंटन में देरी पर नाराजगी जताई। 13 मार्च की बैठक में डिप्टी सीएम ने पूछा स्थिति वही रही जो 10 जनवरी की बैठक में थी। इस लापरवाही पर फटकार लगाते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि उद्योगों के लिए जमीन आवंटन में देरी नहीं होनी चाहिए।

बड़ा सवाल : अड़चनों की जांच पहले करने के बाद आवेदन, फिर भी आवंटन में देरी क्यों?

उद्योग स्थापना के लिए जमीन का चयन एमपीआईडीसी के द्वारा करने के बाद राजस्व व वन विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करती है। सर्वे में किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होने संबंधी रिपोर्ट मिलने पर एमपीआईडीसी के अधिकारी भोपाल में प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेजते हैं। वहां सभी स्तर पर जांच मेें जमीन क्लीयर होने के बाद आरसीएमएस पोर्टल पर जमीन आवंटन के लिए आवेदन किया जाता है।

इस आवेदन के बाद कलेक्टर को जमीन एमपीआईडीसी को ट्रांसफर करना होता है। जानकर ताज्जुब होगा कि इसके बाद भी शहडोल में जमीन आवंटन के 5 आवेदन लंबित हैं।

Created On :   16 March 2026 4:39 PM IST

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