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Umaria news: एकमात्र शक्तिपीठ ज्वाला देवी मंदिर : भोर में वनराज लगाने आते हैं माता की हाजिरी

डिजिटल न्यूज़ उमरिया
मानपुर तहसील स्थित मां ज्वालामुखी (रोहनिया) शक्तिपीठ मंदिर आस्था व वैभवशाली इतिहास का अनूठा संगम है। पुरातत्व विभाग से संरक्षित इस धरोहर का निर्माण 12-13वीं शताब्दी में माना गया है। खासबात यह है कि बांधवगढ़ के मानपुर बफर से लगे इस धार्मिक स्थल में इंसानों के साथ ही बाघ का मूवमेंट इसे खास बनाता है। पीढ़ियों से चली आ रही आस्था की परंपरा में कभी भी बाघ जैसे हिंसक जानवरों ने चोट नहीं पहुंचाई। इसकी पुष्टि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने भी की है। चरणगंगा तट पर उमरिया जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर ग्राम पंचायत माला के तट पर देवी मंदिर स्थित है। चरणगंगा नदी के तट पर देवी मंदिर प्राचीन वास्तुकला व भव्य शिल्पकारी का अद्भुत नमूना है। सामने की दीवार में उकेरे शैल चित्र व स्तंभ में बेहद बारीक नक्काशी की गई है। जालियां, कंगूरे व छोटे कोठार प्राचीन वास्तुकला की भव्यता दिखाते हैं। गर्भगृह में विराजी मां ज्वाला की प्रतिमा काले पत्थर से बनाई गई है। प्रतिमा का आकार, हाथ में त्रिशूल व नयन इसके शक्ति रूप का बखान करते हैं। मंदिर के पीछे व ऊंचाई की की गई नक्काशी अद्भुत है। पुरातत्व से संरक्षित एकमात्र देवी मंदिर पुरातत्व विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के जिलों में राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची जारी की गई है। उमरिया जिले में पांच स्मारक व स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। पुरातत्व विभाग के अनुसार विश्वनाथ मंदिर (ज्वालामुखी) रोहनिया का नाम दिया गया है। इसका निर्माण 12-13वीं शताब्दी में माना गया है। यानी बिलासपुर तहसील का सीतामढ़ी (आठवीं शताब्दी), उमरिया का सगरा मंदिर (10-11 शताब्दी) के बाद तीसरा यह 12-13वीं शताब्दी का प्राचीन मंदिर है। खासबात यह है कि सूची में शामिल पांचों धरोहरों में एकमात्र देवी मंदिर है। वनराज हैं प्रथम सेवक मंदिर के पुजारी राजाराम तिवारी बताते हैं कि इस मंदिर का उल्लेख नारद संहिता में हुआ है। इसका निर्माण तीन हजार साल पहले राजा विक्रमादित्य ने कराया था। यहां माता सती की जिह्वा गिरने का प्रमाण मिलता है। मंदिर में माता के नौ रूपों का चित्रण है। माता की ऐसी अनुभव छवि विरले ही है। यही नहीं पीछे बांधवगढ़ का जंगल लगा है। मैं स्वयं सालों से यहां पूजा कर रहा हूं। माता के सिंह की सवारी के रूप में बाघ कई बार मंदिर परिसर में आ चुके हैं। तीन दिन पूर्व ही बाघ को देखा गया, लेकिन आज तक वनराज ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।
Created On :   13 Oct 2026 5:26 PM IST












