दैनिक भास्कर हिंदी: धन-संपत्ति और पत्नी से जुड़ी ये बातें किसी को नहीं बतानी चाहिए

December 9th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महान चाणक्य ने बहुत सी ऐसी बातें कहीं हैं जिन्हें अगर अपने जीवन पर उतार लिया जाए तो मनुष्य आने वाली बहुत सी आपदाओं से बच सकता है। आज हम उनके कुछ ऐसे ही वचनों पर गौर करेंगे जो आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।

श्लोक
अर्थनाशं मनस्तापं गृहे दुश्चरितानि च । वञ्चनं चापमानं च मतिमान्न प्रकाशयेत॥

यह आचार्य चाणक्य का श्लोक है जिसका संबंध पत्नी और धन से है। इस श्लोक के भावार्थ पर ध्यान दें तो इसका अर्थ है कि धन का नाश हो जाने पर, मन में दुखः होने पर, अपनी पत्नी के गलत चाल-चलन का पता लगने पर, कोई नीच व्यक्ति आपके लिए अभद्र टिप्पणी कर दे तो या कहीं अपमानित होने पर अपनी पीड़ा किसी से साझा नहीं करना चाहिए। लोग सिर्फ पीठ पीछे मजाक उड़ाते हैं, आपकी पीड़ा कोई नहीं समझता।

. चाणक्य के वचन अनुसार कभी आपको लगे कि आपकी पत्नी का चरित्र सही नहीं है, आपको उसके चाल-चलन पर संदेह हो तो आपको ये बातें अपने परम से परम सहयोगी व्यक्ति को भी नहीं बतानी चाहिए। 
. यदि व्यापार या नौकरी में आपका घाटा हो गया हो तो या कहीं पैसों के लेन-देन में आपको हानि मिले, कोई आपका धन चुरा ले तो ये सब बातें अपने सबसे हितेषी मित्र को भी ना बताएं। ऐसा करने से आप अपना सम्मान खो सकते हैं।
. यदि कभी आप दुखी हों, आपके मन को कभी चोट पहुंची हो या आपका मन कहीं ना लग रहा हो तो ये सब बातें भी अपने तक ही रखनी चाहिए।

आचार्य चाणक्य का जन्म सदियों पूर्व हुआ था, उन्होंने जो बाते कहीं वह उस काल के अनुसार रही होंगी, लेकिन आप इस बात को नकार नहीं सकते कि चाणक्य दूर दृष्टि गोचर थे। उन्होंने उस काल में रहते हुए भी वो बातें भी कह डाली जो सदियों बाद आज भी उतना ही महत्व रखती हैं जितना कि वह उस समय रखती होंगी।

इसका कारण उनका मानव प्रवृत्ति पर गहरी पकड़ होना था। वह जानते थे कि मानव चाहे इस काल का हो या सदियों पार भविष्य काल का, उसका मौलिक स्वभाव मानव चरित्र कभी बदल नहीं सकता। यह समाज हम सभी मानवों से मिलकर ही बना है तो स्वाभाविक है यह भी कभी नहीं बदलेगा। इसलिए उनके वचन आज भी शत प्रतिशत सही होते हैं, फिर हम चाहे उनकी बातें मानें या नहीं माने।