दैनिक भास्कर हिंदी: माह में सिर्फ एक दिन करें इस मंत्र का जाप, बनेंगे सभी बिगड़े काम

January 31st, 2019

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि आपके जन्म नक्षत्र का आपके जीवन में क्या महत्व है ? यदि आपका जन्म नक्षत्र निर्बल हो जाए तो यह अपने ही परिवार के लोगों को शत्रु बनाने लगता है। आपके मित्र भी शत्रु बनने लगते हैं और जातक के हितैषी भी कम होने लगते हैं। आपकी कुंडली से जुड़े इस जन्म नक्षत्र को बलिष्ठ करने के लिए एक बहुत ही सरल और अचूक उपाय है।  

जन्म नक्षत्र के मंत्र का जाप और वह भी उस दिन जिस दिन चन्द्रमा उस नक्षत्र पर गोचर करते हों। कहने का अर्थ है कि महीने में मात्र एक दिन। आइए जानते हैं वह मंत्र क्या हैं ?

अश्वनी व रेवती नक्षत्र में -
इस नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए 'ॐ ऐं' मंत्र का जाप एक माला अर्थात् 108 बार करना चाहिए। 
इससे सभी प्रकार के लाभ देता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

भरणी नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों को भरणी नक्षत्र में चन्द्रमा के गोचर के समय में "ॐ ह्रीं" मंत्र का जाप एक माला अर्थात 108 बार करना चाहिए। यह मंत्र सभी विपत्ति और बाधाओं को दूर करता है।

कृतिका व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा का गोचर काल में गायत्री मंत्र 
"ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्॥" 
का जाप करना चाहिए। इससे सभी बाधाएं दूर होंगी।

रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए इन नक्षत्रों में चन्द्रमा के गोचर काल के समय में "ॐ ऋं, ॐ ऌं" मंत्र का जाप एक माला अर्थात 108 बार करना चाहिए। यह अनिष्ट प्रभावों को दूर कर शुभ फल प्रदान करता है।

आर्द्रा, मघा, अश्लेषा, पूर्वाफाल्गुनी व अभिजित नक्षत्र में -
इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल में भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र
"ॐ नम:शिवाय" का एक माला जाप करना चाहिए। इससे सभी दोष दूर होते हैं।

पुनर्वसु ,पुष्य, हस्त व अनुराधा नक्षत्र में -
"ॐ" मंत्र का एक माला जाप चन्द्रमा के गोचर काल में करने से सभी प्रकार के क्लेश दूर होते हैं।

चित्रा, मूल, धनिष्ठा व स्वाति नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नम:" मंत्र का एक माला जाप जातक को शुभ फल दायी होता है।

विशाखा नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ यम् या ॐ राम" का एक माला तक जाप जातक के पापत्व मिटाकर शुभ फल बढ़ाते हैं।

ज्येष्ठा नक्षत्र में - 
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ धं" मंत्र का एक माला जाप लाभप्रद होता है।

पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ बँ" मंत्र का एक माला जाप करने से सुख व सफलता की प्राप्ति होती है।

उत्तराषाढ़ व श्रवण नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ भाम्" मंत्र का एक माला जाप समस्त परेशानियों को दूर कर आरोग्य व् यश की वृद्धि करता है।

शतभिषा नक्षत्र में -
इस नक्षत्र के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ लं" मंत्र का एक माला जाप सभी विपत्तियों का नाश करता है।

पूर्व भाद्रप्रद व उत्तर भाद्रप्रद नक्षत्र में -
इन नक्षत्रों के जातकों के लिए चन्द्रमा के गोचर काल के दौरान "ॐ शं" मंत्र का एक माला जाप करने से शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है।