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क्या होता है गजकेसरी योग, किस राशि में क्या डालता है प्रभाव ? 

July 20th, 2018 18:03 IST
क्या होता है गजकेसरी योग, किस राशि में क्या डालता है प्रभाव ? 

डिजिटल डेस्क, भोपाल। गजकेसरी योग को असाधारण योग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में उपस्थित होता है उसे जीवन में कभी भी अभाव नहीं खटकता। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश और कीर्ती स्वत: खिंची चली आती है। जब कुंडली में गुरु और चंद्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है। लग्न स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है।


वैसे यह योग अकारक होने पर भी फलदायी माना जाता है परन्तु यह मध्यम दर्जे का होता है चंद्रमा से केंद्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेसरी योग बनता है। यह योग मूलतः बृहस्पति और चन्द्रमा के संयोग से बनता है। गज का अर्थ है हाथी और केसरी मतलब सिंह।

जिस प्रकार से गज और सिंह में अपार साहस, शक्ति होती है उसी प्रकार से जन्म कुण्डली में गजकेसरी योग होने से व्यक्ति साहस व सूझबूझ के दम पर, उच्च पद व प्रतिष्ठा प्राप्त कर सामाज में सम्मानीय होता है। आज हम आपको कुण्डली की लग्न और राशि के अनुसार बनने वाले गजकेसरी योग के फल के बारे में बता रहे हैं।

1. मेष लग्न 

मेष राशि का स्वामी मंगल होता है। मंगल का गुरू व चन्द्रमा दोनों से संबंध अच्छा रहता है। इस राशि में गजकेसरी योग बनने से जातक साहसी व तर्कशील होता है। शत्रुओं पर विजय पाता है एवं वाद-विवाद में उसे महारथ हासिल होती है। गुरू महत्वाकांक्षा और राजनीति से जुड़ा ग्रह है, इसलिए मेष राशि वालों को गजकेसरी योग राजनीति में भी सफलता दिलाता है। आप कठोर निर्णय लेने में हिचकेंगे नहीं। धन की पर्याप्त मात्रा रहती है।

2. वृष लग्न 

इस लग्न का स्वामी शुक्र होता है एवं चन्द्रमा तृतीयेश व गुरू अष्टमेश तथा लाभेश होता है। इस लग्न में गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति को धार्मिक कार्यों में रूचि, स्वभाव में सहृदयता, परोपकार की भावना मन में विद्यमान रहती है। गुरू अगर अच्छी स्थिति में अचानक धन का लाभ एवं भूमि आदि मिल सकती है। चन्द्रमा पराक्रमेश होने के कारण आप-अपने बलबूते पर सफलता प्राप्त करेंगे।

3. मिथुन लग्न 

गजकेसरी योग मिथुन इस लग्न में चन्द्रमा द्वितीयेश है और गुरू सप्तमेश व दशमेश है। गुरू व चन्द्र की युति से बनने वाला गजकेसरी योग काफी लाभकारी सिद्ध होगा। ऐसे व्यक्ति दूसरों का हित करने वाले प्रतिभाशाली होते हैं। गुरू दशमेश होकर अगर अच्छी पोजीशन में बैठा है तो मिथुन लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग राजनीति के क्षेत्र में सफलता दिलाता है।

4. कर्क लग्न 

गजकेसरी योग जब कर्क लग्न की कुण्डली में निर्मित होता है तो जातक विद्वान होता है। ऐसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है, वहां लोकप्रिय हो जाता है। संस्कारों से जुड़े ऐसे जातक अपनों को साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं। ये लोग सत्य का साथ देने में विश्वास करते हैं। इनकी लगभग हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

5. सिंह लग्न 

सिंह लग्न की कुण्डली में बनने वाला गजकेसरी योग बहुत ही फलदायक होता है। यह योग सिंह के समान शक्ति देने वाला होता है। शत्रुओं का नाश करता है, राज सुख दिलाता है, जीवन के प्रति आशावाना बनाता है, घूमने-फिरने का शौकीन बनाता है, प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ाता है। इस लग्न में जन्मे व्यक्तियों को संसार की आसुरी शक्तियों से लड़ने का जज्बा मिलता है।

6. कन्या लग्न 

इस लग्न में जन्में जातकों के लिए भी गजकेसरी योग लाभकारी सिद्ध होता है। जिनकी कुण्डलियों में गजकेसरी योग होता है, उनमें निर्भीकता, बौद्धिकता, साहस, धार्मिकता, सामाजिकता व न्यायप्रियता आदि होती है। गुरू चतुर्थेश व सप्तमेश होता है और चन्द्रमा लाभ भाव का मालिक होता है। जिस कारण कन्या लग्न में बनने वाले गजकेसरी योग का युवा अवस्था में फल मिलने की संभावना रहती है।

7. तुला लग्न 

तुला लग्न की कुण्डली में गुरू तृतीयेश व षष्ठेश होता है एवं चन्द्रमा दशम भाव का मालिक होता है। इसलिए इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग मिला-जुला फल देने वाला होता है। यह व्यक्ति अपने जन्म निवास दूर-दराज प्रदेश या विदेश में जाकर धन कमाता है। जातक स्वभाव से जिद्दी व तानाशाही प्रकृति का होता है।

8. वृश्चिक लग्न 

गजकेसरी योग वृश्चिक इस लग्न में गजकेसरी योग बनने से व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में कुशल होता है एवं अपनी जुबान का पक्का होता है। साहसी कार्यो में विजय हासिल करता है। ऐसे जातक पुलिस, मेडिकल, आर्मी, वायुसेना आदि क्षेत्रों में ऊंचा मुकाम हासिल करता है। ये लोग अपनी सूझबूझ के कारण काफी चर्चित रहते हैं।

9. धनु लग्न 

धनु राशि का स्वामी गुरू ग्रह होता है। गजकेसरी योग में गुरू की अहम भूमिका होती है। अतः इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध होता है, लेकिन यदि गुरू बलवान अवस्था में हो तभी पूर्ण फल मिल पाएगा। ऐसा व्यक्ति धार्मिक कार्यो में लिप्त रहने वाला होता है। शिक्षा के क्षेत्र में ये लोग अच्छी प्रगति करते हैं।

10.मकर लग्न 

मकर लग्न का स्वामी शनि ग्रह है। शनि और गुरू की आपस में अच्छी मित्रता है। जिस कारण इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग काफी फलदायक माना जाता है। शनि एक नाकारात्मक ग्रह है जिसका अधिक असर इस लग्न में रहता है। यदि इस लग्न की कुण्डली में शनि और गुरू दोनों बलवान हैं तो इस योग का बेहतर फल मिलेगा अन्यथा सामान्य फल मिलेगा।

11. कुम्भ लग्न 

इस लग्न की कुण्डली में बनने वाले गजकेसरी योग का भी अच्छा फल मिलता है। यह भी शनि की राशि है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रूपया वाली स्थिति बनी रहती है। मित्रों के सहयोग से बड़े कामों में सफलता मिलती है। सोचे हुए कार्य पूर्ण होते हैं किन्तु समय लगता है।

12. मीन लग्न 

मीन राशि बृहस्पति की राशि है। इसलिए इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग सफलता दिलाने में पूरा सहयोग करता है। ऐसा व्यक्ति धर्म का जानकार होता है, शिक्षा देने वाला गुरू व सामाज की सेवा व एक सही मार्ग दिखाने वाला समाज सुधारक होता है। इस योग वाले व्यक्ति सम्मान व प्रतिष्ठा के भूखे रहते हैं।

यह योग मीन राशि धनु राशि। वृष राशि पर भी बहुत लाभप्रद रहता है मगर यह योग 6, 8, 12 भाव में ना हो अगर यह 6, 8, 12 भाव में हुए तो जातक को इतना लाभ नहीं दे पाते दूसरी बात यह कि अगर गुरू वक्री हुआ तो भी उत्तम फल नहीं मिलेगा यह योग चन्द्रमा की नीच राशि पर या गुरु की नीच राशि पर हुआ तो भी निष्फल हो जाएगा अगर ग्रह का नीच दोष भंग ना हो रहा हो तो लग्न कमजोर हुआ तो भी योग में कमी आ जाएगी।  
 

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