दैनिक भास्कर हिंदी: कोविड-19 के खिलाफ आपसी सहयोग और एकजुटता जरूरी

April 26th, 2020

हाईलाइट

  • कोविड-19 के खिलाफ आपसी सहयोग और एकजुटता जरूरी

बीजिंग, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। इस समय कोविड-19 वैश्विक महामारी हर ओर फैली है और इससे सभी देश लड़ रहे हैं, लेकिन सभी देशों के बीच इससे लड़ने के लिए आपसी एकजुटता और सहयोग की कमी साफ देखने को मिल रही है। हाल ही में ट्रंप सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को राशि देने से इंकार कर दिया और यह निर्णय तब लिया गया जहां दुनिया के 207 देश और क्षेत्र महामारी से निपटने की जद्दोजहद में लगे हैं। अमेरिका द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) की राशि रोकना सच में दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका असर खुद अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी पहले से डब्लयूएचओ पर चीन की तरफदारी करने और सूचनाओं को छिपाने का आरोप लगाते आ रहे हैं, लेकिन इसका अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। देखा जाए तो डब्लयूएचओ के कुल बजट का 15 फिसदी हिस्सा अमेरिका से ही आता है। कह सकते हैं कि कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया की लड़ाई में डब्लयूएचओ की कोशिशें काफी अहम है। वह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में समन्वय की भूमिका निभाएगा और कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था होने वाले मध्य और छोटे देशों को महामारी की रोकथाम में सहायता देगा। पर ऐसे समय में पूरी दुनिया में स्वास्थ्य संकट चल रहा है तो राशि रोकना खतरनाक साबित हो सकता है। डब्लयूएचओ के जरिए बहुत से देशों ने कोरोना से लड़ने का हौसला और तरीका हासिल किया है।

इस जानलेवा वायरस से समाज और अर्थव्यवस्था को भीषण खतरा है। इसने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को जिस तरह से तहस-नहस किया है, वह किसी आपदा से कम नहीं है। इस समय सभी देशों को एकजुट होकर इस भयावह महामारी से निपटने की जरुरत है। कोरोना समाप्त होने के बाद का आर्थिक संकट इससे भयावह होगा और विश्व के कई देशों के सामने भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दे खड़े होने वाले हैं। इसलिए देशों को आने वाली आर्थिक चुनौती से निपटने का हल खोजना चाहिए, और इसे केवल आपसी सहयोग और एकजुटता से ही निपटा जा सकता है।

(साभार-चाइना रेडियो इंटरनेशनल, पेइचिंग)